ऊना।
हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (HPTU) द्वारा रविवार को आयोजित बी फार्मा और बीटेक की प्रवेश परीक्षा के दौरान पीजी कॉलेज ऊना में भारी अव्यवस्था का आलम देखने को मिला।
परीक्षा केंद्र पर पहुंचे परीक्षार्थी और उनके अभिभावक कॉलेज प्रशासन की लचर व्यवस्थाओं के कारण सुबह-सुबह ही परेशान हो उठे। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के समय तक विद्यार्थियों को उनके रोल नंबर और परीक्षा हॉल की सही जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे छात्र परिसर में बदहवास होकर इधर-उधर भागते नजर आए।
नोटिस बोर्ड पर भ्रम और पुरानी सूचियां
परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप है कि कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर रोल नंबर सूचियां सही तरीके से प्रदर्शित नहीं की गई थीं। हद तो तब हो गई जब कुछ कमरों के बाहर पुरानी परीक्षाओं की सूचियां लगी होने के कारण छात्र गलत कमरों में प्रवेश कर गए और बाद में उन्हें वहां से बाहर निकाला गया।
अभिभावकों ने बताया कि सुबह 9 बजे परीक्षा शुरू होनी थी, लेकिन 9:45 बजे तक कई छात्र अपना कमरा ही ढूंढ रहे थे। स्थिति को बिगड़ते देख अभिभावकों ने खुद हस्तक्षेप कर बंद पड़े कमरों को खुलवाया।
मानसिक तनाव और गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
अभिभावकों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इस अव्यवस्था के कारण बच्चे परीक्षा शुरू होने से पहले ही मानसिक तनाव में आ गए। इसके अलावा, भीषण गर्मी के बावजूद परीक्षार्थियों को पानी की बोतल अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे बच्चों की परेशानी और बढ़ गई।
अभिभावक श्वेता ठाकुर, जगजीत चौहान और जितेंद्र कुमार ने कहा कि प्रवेश परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में कॉलेज प्रशासन का ऐसा रवैया विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रिंसिपल का पक्ष: 'पैनिक' के कारण नहीं दिखी सूचियां
वहीं, पीजी कॉलेज ऊना की प्रिंसिपल डॉ. मीता शर्मा ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कॉलेज प्रशासन ने सभी निर्धारित स्थानों पर सूचियां चस्पा की थीं। उन्होंने तर्क दिया कि परीक्षा के समय विद्यार्थियों और अभिभावकों में अचानक घबराहट (पैनिक) की स्थिति बन गई थी, जिसकी वजह से उनका ध्यान नोटिस बोर्ड पर लगी सूचनाओं की ओर नहीं
गया। उन्होंने माना कि भीड़ अधिक होने से कुछ असुविधा हुई होगी और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था के लिए खेद प्रकट किया।
आंदोलन की चेतावनी और सुधार की मांग
अभिभावकों ने मांग की है कि भविष्य में तकनीकी विश्वविद्यालय को ऐसे केंद्रों पर परीक्षा आयोजित करने से पहले बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा संस्थानों में इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो वे इसके खिलाफ उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे। फिलहाल, अव्यवस्थाओं के साये में ही प्रवेश परीक्षा संपन्न हुई, लेकिन कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।