संस्कृत कॉलेजों के शास्त्री छात्रों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, भाजपा नेता विक्रम वर्मा ने भर्ती नियमों पर उठाए सवाल
हिमाचल प्रदेश के संस्कृत कॉलेजों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के 20 से अधिक संस्कृत महाविद्यालयों में अध्ययनरत 20 हजार से ज्यादा छात्र विभिन्न सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग नहीं ले पा रहे हैं।
इनमें पुलिस कांस्टेबल, होमगार्ड और वन विभाग सहित अन्य विभागों की भर्तियां शामिल हैं। भर्ती की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े नियमों के कारण संस्कृत पृष्ठभूमि के छात्रों को आवेदन का अवसर नहीं मिल रहा है। इस मामले को लेकर शास्त्री की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश भाजपा के राज्य सह मीडिया प्रभारी विक्रम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के 20 से अधिक संस्कृत कॉलेजों के 20 हजार से ज्यादा छात्र प्रशासनिक अनदेखी के कारण प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रही पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में भी इन छात्रों को भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। संस्कृत डिग्री को सामान्य स्नातक या उच्च माध्यमिक डिग्री के समकक्ष नहीं माने जाने के कारण छात्र आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
विक्रम वर्मा के अनुसार, प्रभावित छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से पुलिस भर्ती की शारीरिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया शुरू होने पर शैक्षणिक योग्यता के नियमों के चलते उन्हें बाहर कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत विषय से पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी अन्य विद्यार्थियों की तरह सरकारी नौकरियों में अवसर मिलना चाहिए। वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश सरकार ने इस मामले में उचित कदम नहीं उठाए तो छात्र सरकार की नीतियों के खिलाफ उग्र आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
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