प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र अत्री की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से की मुलाकात; 3 लाख रुपये आय सीमा खत्म करने की उठाई मांग।
हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ ने अपनी मांगों को लेकर शिमला सचिवालय में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मीडिया सलाहकार और मुख्य सचिव से मुलाकात की। संघ के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र अत्री की अगुवाई में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने करुणामूलक परिवारों की लंबित समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा और जल्द समाधान की मांग की।
संघ ने सरकार से मांग की कि करुणामूलक नीति में लागू 3 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा की शर्त को समाप्त किया जाए और सभी पात्र करुणामूलक आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के आधार पर जल्द नौकरी प्रदान की जाए।
1650 आश्रितों को आय सीमा के कारण वंचित रखने पर सवाल
रविंद्र अत्री ने कहा कि करीब 1650 करुणामूलक आश्रितों को केवल इसलिए नौकरी से वंचित रखा जा रहा है क्योंकि उनके परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन परिवारों की क्या गलती है, जिन्होंने भी सरकारी सेवाकाल के दौरान अपने परिवार के कमाने वाले सदस्य को खोया है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी परिवार के दुख और संघर्ष को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए। सभी करुणामूलक परिवारों को समान दृष्टि से देखते हुए राहत दी जानी चाहिए।
चुनावी वादे को पूरा करने की मांग
संघ ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनावों के दौरान करुणामूलक आश्रितों को बिना शर्त नौकरी देने का वादा किया था। अब समय आ गया है कि सरकार अपने वादे को पूरा करते हुए सभी लंबित मामलों का समाधान करे।
रविंद्र अत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि चाहे किसी आश्रित की वार्षिक आय 3 लाख रुपये हो या उससे अधिक, सभी ने अपने माता-पिता या परिवार के कमाने वाले सदस्य को खोया है। इसलिए उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
15 से 20 साल से नौकरी का इंतजार
करुणामूलक संघ ने कहा कि कई आश्रित पिछले 15 से 20 वर्षों से नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं और आर्थिक परेशानियों के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। संघ ने मांग की कि आगामी कैबिनेट बैठक में करुणामूलक आश्रितों के हित में निर्णय लिया जाए और स्थायी नीति बनाई जाए।
रिजेक्ट किए गए 2542 मामलों पर भी पुनर्विचार की मांग
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र अत्री ने पूर्व सरकार द्वारा रिजेक्ट किए गए करीब 2542 करुणामूलक मामलों को भी बिना भेदभाव के दोबारा विचार (री-कंसिडर) करने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि सरकार को करुणामूलक परिवारों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हुए जल्द राहत भरा फैसला लेना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवार अपने जीवन को संभाल सकें।
वहीं, मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
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