बच्चों में बढ़ रहे हैं मिट्टी-चॉक खाने के मामले: शिमला DDU अस्पताल के डॉक्टरों की चेतावनी, जानें 'पिका' बीमारी के लक्षण और बचाव

बच्चों में बढ़ रहे हैं मिट्टी-चॉक खाने के मामले: शिमला DDU अस्पताल के डॉक्टरों की चेतावनी, जानें 'पिका' बीमारी के लक्षण और बचाव
बच्चों में बढ़ रहे हैं मिट्टी-चॉक खाने के मामले: शिमला DDU अस्पताल के डॉक्टरों की चेतावनी, जानें 'पिका' बीमारी के लक्षण और बचाव

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शिमला के दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल (DDU) की स्टडी में खुलासा—एनीमिया, कुपोषण और मानसिक तनाव के कारण बच्चे खा रहे हैं गैर-खाद्य वस्तुएं; जानें विशेषज्ञों की सलाह।

यदि आपका बच्चा मिट्टी, चॉक, राख, बाल, कागज, कपड़ा या बर्फ जैसी गैर-खाद्य वस्तुएं (Non-food items) खाता है, तो इसे महज बचपन की शरारत समझकर नजरअंदाज न करें। यह 'पिका' (Pica) नामक ईटिंग डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है।

शिमला स्थित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) जोनल अस्पताल के बाल रोग विभाग की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बीते दो वर्षों में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

DDU अस्पताल की रिपोर्ट में क्या आया सामने?

बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा तैयार अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार:

पिका बीमारी के प्रमुख कारण (Causes of Pica):

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पोषण की कमी और मानसिक कारण इस विकार का मुख्य आधार बनते हैं:

  1. एनीमिया (खून की कमी) और जिंक की कमी।

  2. कुपोषण और संतुलित आहार न मिलना।

  3. मानसिक तनाव और डिप्रेशन।

  4. ऑटिज्म और अन्य न्यूरो-डेवलपमेंटल (विकास संबंधी) समस्याएं।

नजरअंदाज करने पर हो सकते हैं ये गंभीर खतरे:

यदि समय रहते पिका का उपचार न कराया जाए, तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है:

अभिभावकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह (क्या करें और क्या न करें):

"बच्चा अगर चॉक, मिट्टी या ऐसी अन्य चीजें खाए तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें ताकि स्थिति गंभीर न हो। बच्चों को पौष्टिक एवं संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है।"

— डॉ. अंकुर धर्माणी, बाल रोग विशेषज्ञ (DDU अस्पताल, शिमला)

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