काजा में जागरूकता, टीकाकरण और उपचार से हेपेटाइटिस बी-सी के मामलों में बड़ी गिरावट। बरसात में हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी।
हिमाचल प्रदेश में हेपेटाइटिस संक्रमण के मामले चिंता का विषय बन रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नशे के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली संक्रमित सुइयां और युवाओं में बढ़ता टैटू बनवाने का चलन हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है।
प्रदेश में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे और किशोर भी हेपेटाइटिस से संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमण का एक बड़ा कारण एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करना और कई लोगों द्वारा एक ही संक्रमितस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाते समय भी संक्रमण का खतरा रहता है। कई जगहों पर यदि एक ही निडल का इस्तेमाल अलग-अलग सुई साझा करना है।
टैटू बनवाते समय सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाते समय भी संक्रमण का खतरा रहता है। कई जगहों पर यदि एक ही निडल का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों पर किया जाता है तो हेपेटाइटिस फैल सकता है।
इसके अलावा संक्रमित रक्त, शरीर के तरल पदार्थों और संक्रमित मां से बच्चे में भी हेपेटाइटिस बी फैलने का खतरा रहता है।
काजा में हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में आई कमी
हिमाचल के दुर्गम क्षेत्र काजा में हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2015 से 2017 के बीच इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विभिन्न विभागों द्वारा किए गए अध्ययन में काजा में हेपेटाइटिस बी और सी की संक्रमण दर 22.7 प्रतिशत पाई गई थी, जो देश में सबसे अधिक दरों में शामिल थी।
इसके बाद क्षेत्र में टीकाकरण, उपचार और बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए। इन प्रयासों के बाद संक्रमण दर घटकर 0.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। करीब 30 हजार आबादी वाले काजा क्षेत्र में वर्तमान में हेपेटाइटिस बी और सी के 98 मरीज हैं।
बरसात में बढ़ जाता है हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा
मानसून के दौरान हिमाचल में हेपेटाइटिस ए और ई के मामलों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है। ये दोनों जलजनित रोग हैं, जो दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के सेवन से फैलते हैं।
वर्तमान में कुल्लू जिले में हेपेटाइटिस ए के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले दो सप्ताह में यहां 70 से अधिक मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को नियमित एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय
उबला हुआ या सुरक्षित उपचारित पानी का सेवन करें।
साफ और स्वच्छ भोजन खाएं।
नियमित रूप से हाथ धोने की आदत अपनाएं।
हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण जरूर करवाएं।
सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं।
केवल रोगाणुरहित इंजेक्शन और जांचे हुए रक्त का इस्तेमाल करें।
सुइयों को साझा करने से बचें।
चिकित्सा उपकरणों की स्वच्छता सुनिश्चित करें।
समय पर जांच से बच सकती है गंभीर बीमारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस कई बार शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, जिसके कारण लोगों को संक्रमण का पता देर से चलता है। समय पर जांच और उपचार से लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला डॉ. यशपाल रांटा ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और जोखिम की स्थिति में समय पर जांच करवाकर हेपेटाइटिस के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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