मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं श्रमिक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इन योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ बच्चों की उच्च शिक्षा, विवाह और चिकित्सा जैसी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
शिक्षा सहायता से संवर रहा श्रमिकों के बच्चों का भविष्य
सरकार की शिक्षा सहायता योजना का लाभ लेकर श्रमिक परिवारों के बच्चे एमबीबीएस, एमएससी, बीएससी, बीबीए, एमकॉम सहित विभिन्न व्यावसायिक और उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिल रहा है।
रवि दत्त के परिवार को मिला योजनाओं का लाभ
घुमारवीं तहसील की ग्राम पंचायत फटोह के गांव रोपा निवासी 56 वर्षीय रवि दत्त पिछले करीब 25 वर्षों से पेंटिंग और मजदूरी का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 10 से 12 वर्ष पहले कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण कराने के बाद उन्हें कई योजनाओं का लाभ मिला।
उन्होंने बताया कि उनके बच्चों को स्कूली शिक्षा के दौरान छात्रवृत्ति मिली। उनकी बड़ी बेटी ने एमएससी की पढ़ाई पूरी की और इस वर्ष उसके विवाह के लिए सरकार से ₹60 हजार की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।
वहीं दूसरी बेटी डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है, जिसके लिए इस वर्ष ₹1.20 लाख की शिक्षा सहायता मिली। उनका बेटा बीएससी की पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रवि दत्त का कहना है कि बोर्ड की आर्थिक सहायता से वे अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बेटी का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न कराने में सफल रहे।
कृष्ण चंद को भी मिला शिक्षा, विवाह और चिकित्सा सहायता का लाभ
घुमारवीं के वार्ड नंबर-3 निवासी 56 वर्षीय कृष्ण चंद पिछले लगभग चार दशकों से पेंटिंग का कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। वर्ष 2013 में कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण के बाद उनके बच्चों को लगातार छात्रवृत्ति का लाभ मिला।
उनके बच्चों ने बीकॉम, पॉलिटेक्निक और बीबीए जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की। कृष्ण चंद को बेटी के विवाह के लिए ₹51 हजार और बेटे की छात्रवृत्ति के रूप में ₹11 हजार की सहायता मिली। इसके अलावा चिकित्सा सहायता योजना के तहत उपचार संबंधी खर्च में भी राहत मिली है।
बिलासपुर में हजारों परिवारों को मिला लाभ
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार के अनुसार, जिले में विवाह सहायता योजना के तहत 968 लाभार्थियों को लगभग ₹5 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत 503 लाभार्थियों को लगभग ₹1.48 करोड़ की आर्थिक सहायता दी गई है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से श्रमिक परिवारों के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण प्रभावित नहीं हो रही है और उन्हें बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिल रहा है।
सरकार श्रमिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध
नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि जिला बिलासपुर में लगभग 50 हजार निर्माण श्रमिक कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हैं। यह सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर श्रमिकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। सरकार भविष्य में भी श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए इसी तरह कार्य करती रहेगी।
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