24 हजार मेगावाट क्षमता के बावजूद आधी ताकत ही इस्तेमाल कर पाया हिमाचल, 530 जलविद्युत परियोजनाएं अब भी अटकीं

24 हजार मेगावाट क्षमता के बावजूद आधी ताकत ही इस्तेमाल कर पाया हिमाचल, 530 जलविद्युत परियोजनाएं अब भी अटकीं
24 हजार मेगावाट क्षमता के बावजूद आधी ताकत ही इस्तेमाल कर पाया हिमाचल, 530 जलविद्युत परियोजनाएं अब भी अटकीं

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प्रदेश ने कुल संभावित क्षमता का केवल 52.6% ही विकसित किया, 7,623 मेगावाट से अधिक क्षमता मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फंसी।

शिमला। देश की 'पावर स्टेट' बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाला हिमाचल प्रदेश आज भी अपनी विशाल जलविद्युत क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। प्रदेश में जलविद्युत उत्पादन की कुल संभावित क्षमता 23,947.25 मेगावाट आंकी गई है, लेकिन अब तक केवल 12,588.63 मेगावाट क्षमता ही विकसित की जा सकी है।

यानी राज्य अपनी कुल संभावित क्षमता का करीब 52.6 प्रतिशत ही उपयोग कर पाया है।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में 189 जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हैं, जबकि 54 परियोजनाएं निर्माणाधीन अथवा विभिन्न चरणों में हैं। वहीं 530 परियोजनाएं और 7,623.61 मेगावाट उत्पादन क्षमता अभी भी मंजूरी, आवंटन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लंबित है।

जलविद्युत विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अधिक रही है। निजी क्षेत्र ने 40 परियोजनाओं के माध्यम से 2,890.51 मेगावाट क्षमता विकसित की है, जबकि 10 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

5 मेगावाट तक की श्रेणी में 110 लघु जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 367.77 मेगावाट है। इसके अलावा केंद्रीय और संयुक्त उपक्रमों ने 13 परियोजनाओं के जरिए 8,311.73 मेगावाट क्षमता विकसित की है।

प्रदेश के सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और यमुना नदी बेसिन जलविद्युत उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें विशेष रूप से चिनाब और सतलुज बेसिन में सर्वाधिक संभावनाएं हैं।

किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू और मंडी जिले जलविद्युत विकास के प्रमुख केंद्र हैं। नाथपा-झाकड़ी, कोल डैम, पार्वती, कडछम-वांगतू और ब्यास परियोजनाओं ने हिमाचल को राष्ट्रीय ऊर्जा मानचित्र पर पहचान दिलाई है, हालांकि कई बड़ी परियोजनाएं अब भी विभिन्न कारणों से लंबित हैं।

पर्यावरणीय और सामाजिक कारणों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 11 परियोजनाओं की 815.40 मेगावाट क्षमता को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। ऊर्जा विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि हिमाचल की लगभग 24 हजार मेगावाट जलविद्युत क्षमता प्रदेश की आर्थिक प्रगति की सबसे बड़ी ताकत है।

सरकार पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय हितों की रक्षा करते हुए लंबित परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के प्रयास कर रही है।

Keywords (English): Himachal Hydropower, Hydroelectric Projects, Himachal Energy, Power Generation, Satluj Basin, Chenab Basin, Renewable Energy, Hydropower Projects, Himachal Government, Energy Department

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