एचजीटीयू प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, स्कूल मर्जर, नई भर्ती, पदोन्नति और ट्रांसफर नीति में सुधार की उठाई मांग।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शनिवार को शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों के अधिकार, स्कूलों में घटते नामांकन और लंबित पदोन्नतियों सहित कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम-2024 को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को पहली नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
वीरेंद्र चौहान ने प्रदेश में लगातार घट रहे छात्र नामांकन और स्कूलों के बंद होने पर चिंता जताते हुए पहली से 12वीं तक के स्कूलों के पूर्ण विलय (Complete Merger) का सुझाव दिया।
उनका कहना था कि इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और शिक्षकों के नए पद समाप्त होने का खतरा भी कम होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और शिक्षा सचिव राकेश कंवर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल देश में 21वें स्थान से पांचवें स्थान तक पहुंचा है।
उन्होंने सरकार से शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक हटाने, साल में कम से कम दो बार आवश्यकता-आधारित ट्रांसफर विंडो खोलने, खाली पदों पर जल्द भर्ती करने और लंबित पदोन्नतियां पूरी करने की मांग की।
इसके अलावा टीजीटी, जेबीटी, सीएंडवी और प्रिंसिपल संवर्ग की पदोन्नति, विशेष वेतन वृद्धियां, अंतर-जिला तबादला कोटा बहाल करने तथा सीबीएसई संबद्ध सरकारी स्कूलों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री से आगामी 15 अगस्त को कर्मचारियों के लिए कम से कम 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) घोषित करने का आग्रह भी किया।
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