याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह में अभ्यावेदन देने और सरकार को 12 सप्ताह में कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश; कर्मचारियों ने केंद्र के बराबर डीए की मांग की।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित 15 फीसदी महंगाई भत्ते (डीए), उससे जुड़े एरियर और किस्तों के भुगतान के मामले में प्रदेश सरकार को निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर संबंधित सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा है। वहीं, सक्षम प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वह अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार 12 सप्ताह के भीतर स्पष्ट और कारण सहित आदेश पारित करे।
अदालत ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी तय समयसीमा में कर्मचारियों की मांगों पर विचार करें। हालांकि, अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
डीए भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
याचिकाकर्ताओं ने लंबित डीए भुगतान को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इससे पहले अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया।
इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
केंद्र और हिमाचल के डीए में अंतर का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों का करीब 15 फीसदी महंगाई भत्ता लंबित है। कर्मचारियों का दावा है कि केंद्र सरकार की तुलना में उन्हें कम डीए मिल रहा है।
याचिका के अनुसार, केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 फीसदी की दर से डीए दे रही है, जबकि हिमाचल सरकार के कर्मचारियों को 45 फीसदी डीए मिल रहा है। कर्मचारियों ने अदालत से मांग की थी कि केंद्र सरकार की तर्ज पर लंबित डीए की सभी किस्तें जारी करने के निर्देश दिए जाएं।
2023 से 2026 तक की कई डीए किस्तें लंबित
याचिका में कहा गया है कि जुलाई 2023 से जनवरी 2026 तक कई चरणों में डीए बढ़ाया गया, लेकिन इसका भुगतान लंबित रहा।
लंबित डीए की स्थिति:
जुलाई 2023 – 4 प्रतिशत
जनवरी 2024 – 4 प्रतिशत
जुलाई 2024 – 3 प्रतिशत
जनवरी 2025 – 2 प्रतिशत
जुलाई 2025 – 3 प्रतिशत
जनवरी 2026 – 2 प्रतिशत
इस तरह कुल 15 फीसदी डीए का भुगतान अभी बाकी होने का दावा किया गया है।
आर्थिक स्थिति का हवाला दे रही सरकार
प्रदेश सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों की देनदारियां काफी अधिक हैं और आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के कारण डीए का भुगतान समय पर नहीं किया जा सका है।
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