करोट गांव के चार भाई प्राकृतिक खेती से संवार रहे आर्थिकी, जिमीकंद की खेती के लिए श्याम लाल ठाकुर को मिल चुका है राष्ट्रीय अवार्ड
जिला बिलासपुर के करोट गांव निवासी प्रेम ठाकुर और उनके तीन भाई श्याम लाल ठाकुर, मस्तराम ठाकुर तथा छोटा राम प्राकृतिक खेती के माध्यम से विभिन्न फसलों का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं।
यह परिवार पारंपरिक फसलों गेहूं, मक्की और धान के साथ-साथ हल्दी और जिमीकंद जैसी नकदी फसलों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। परिवार द्वारा तैयार प्राकृतिक फसलों की पहचान अब केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना चुकी है।
परिवार के श्याम लाल ठाकुर को प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की ओर से वर्ष 2003 में कृषि दूत सम्मान से पुरस्कृत किया जा चुका है। इसके अलावा वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए उन्हें राष्ट्रीय अवार्ड भी मिला था।
यह परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है और प्रतिवर्ष लाखों रुपये का जिमीकंद प्रदेश के साथ-साथ बाहरी राज्यों में भी भेजता है। यही नहीं, जिला बिलासपुर के प्रसिद्ध नलवाड़ी मेले में इस परिवार की बैलों की जोड़ी को कई वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भी मिलता रहा है।
हल्दी की खेती से करीब 2 लाख रुपये का कारोबार
65 वर्षीय किसान प्रेम ठाकुर ने बताया कि पिछले करीब तीन-चार वर्षों से वह प्राकृतिक तौर पर हल्दी की खेती पर विशेष रूप से ध्यान दे रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 20 क्विंटल प्राकृतिक हल्दी तैयार की है।
इसमें से 6 क्विंटल हल्दी जिला आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई है। शेष हल्दी भी आसपास के लोगों ने इसी दाम पर खरीदी। इससे उन्हें हल्दी से करीब 2 लाख रुपये तक का कारोबार हुआ है।
प्रेम ठाकुर प्रतिवर्ष औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह काली हल्दी का भी उत्पादन कर रहे हैं। इस वर्ष करीब डेढ़ क्विंटल काली हल्दी तैयार हुई है, जिसके उन्हें 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम मिले हैं।
औषधीय गुणों के कारण काली हल्दी की अच्छी मांग है। अब वह मेघालय की प्रसिद्ध लकाडोंग हल्दी की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिसमें अन्य हल्दी की तुलना में करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है।
3 बीघा जमीन में जिमीकंद की खेती
प्रेम ठाकुर ने बताया कि उनका परिवार करीब 3 बीघा भूमि में जिमीकंद की खेती कर रहा है। प्रतिवर्ष औसतन 50 से 60 क्विंटल जिमीकंद का उत्पादन होता है। इसे प्रदेश से बाहर 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अच्छे दाम मिल रहे हैं।
इसके अतिरिक्त परिवार धान, मक्की, सोयाबीन और दालों का भी प्राकृतिक तरीके से उत्पादन कर रहा है। परिवार विभिन्न फसलों का बीज भी तैयार करता है। प्रेम ठाकुर ने आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा उन्हें महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट का अवसर भी मिला है।
एमएसपी से किसानों को मिल रहा लाभ
प्रेम ठाकुर का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने से किसानों को फसलों के अच्छे दाम मिल रहे हैं और उनकी आर्थिकी को भी मजबूती मिली है। उन्होंने प्राकृतिक हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने किसानों के हित में फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है, जिससे प्रदेश के हजारों किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
गेहूं, मक्की और हल्दी के एमएसपी में बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास और किसानों के आर्थिक स्वावलंबन को दिशा देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्राकृतिक तौर पर उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
वहीं, मक्की का एमएसपी 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और कच्ची हल्दी का मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में पहली बार अदरक के लिए भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।
प्रदेश सरकार के इस निर्णय से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलने के साथ आजीविका सुरक्षा भी मिल रही है। वहीं, आम लोगों के लिए रसायन रहित, गुणवत्तापूर्ण और पोषणयुक्त खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद मिल रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिला में आत्मा परियोजना के माध्यम से इस वर्ष प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 136 किसानों से करीब 183 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है। इसी प्रकार मक्की की खरीद 60 रुपये और हल्दी की खरीद 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाएगी।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राकृतिक तौर पर उत्पादित फसलों का दाम सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार किसानों को मिले। इससे किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा और उनकी आर्थिकी मजबूत होगी। साथ ही लोगों को रसायनरहित और पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
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