बसोली पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, विधायक सतपाल सत्ती ने प्रशासन से नियमों के अनुसार निर्णय लेने की मांग की
ऊना जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल पीरनिगाह मंदिर के प्रबंधन को लेकर विवाद अब सियासी रूप लेता नजर आ रहा है। शुक्रवार को ग्राम पंचायत बसोली के सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और मंदिर का प्रबंधन दोबारा पंचायत को सौंपने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से मंदिर का संचालन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता रहा है और नई पंचायत के गठन के बाद भी यह जिम्मेदारी पंचायत को वापस मिलनी चाहिए।
प्रदर्शन में ऊना सदर के विधायक एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती भी शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा पर मंदिर के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
सत्ती ने कहा कि पीरनिगाह मंदिर करीब 50 वर्षों से ग्राम पंचायत बसोली के प्रबंधन में रहा है और न्यायालय का निर्णय भी पंचायत के पक्ष में है। उन्होंने प्रशासन से न्यायालय के आदेशों और नियमों के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लेने की मांग की।
सत्ती ने कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान भाजपा समर्थित प्रधान के चुने जाने के बाद मंदिर का प्रभार पंचायत को नहीं सौंपा जा रहा है। उन्होंने मंदिर के चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों को भी तथ्यहीन बताया।
उनके अनुसार पंचायत ने मंदिर की आय-व्यय का हिसाब सार्वजनिक किया है और मंदिर की आय से गांव के विकास, सामाजिक कल्याण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा जरूरतमंद परिवारों की सहायता पर राशि खर्च की गई है।
वहीं, उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद मंदिर का प्रभार पंचायत को सौंपने का मामला सरकार के विचाराधीन है। जिला प्रशासन अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज चुका है और सरकार के दिशा-निर्देश मिलने के बाद आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार के निर्णय में पंचायत के अधिकार, पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखा जाएगा।
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