पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग पूरी, 11 अगस्त से शुरू हो सकता है प्रशिक्षण कार्यक्रम
आयुर्वेद को बढ़ावा देने और युवाओं को पंचकर्म चिकित्सा पद्धति में प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से हिमाचल सरकार की ओर से प्रदेश के विभिन्न जिलों में एक वर्षीय पंचकर्म प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोलन जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भी यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है।
प्रशिक्षण को लेकर अस्पताल में चयनित अभ्यर्थियों की पहली काउंसलिंग आयोजित की गई। सोलन अस्पताल के लिए चयनित 12 अभ्यर्थियों में से 9 अभ्यर्थियों ने रिपोर्ट किया, जबकि नालागढ़ अस्पताल में पंचकर्म प्रशिक्षण के लिए चयनित 15 में से 12 अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग में भाग लिया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार निदेशालय से प्राप्त सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। अब चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच, मेडिकल फिटनेस और अन्य निर्धारित औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी।
सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 11 अगस्त से पंचकर्म प्रशिक्षण कोर्स शुरू होने की संभावना है। यह प्रशिक्षण लगभग एक वर्ष की अवधि का होगा। प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को पंचकर्म चिकित्सा का सैद्धांतिक ज्ञान देने के साथ-साथ मरीजों पर इसकी प्रक्रियाओं की व्यवहारिक जानकारी भी दी जाएगी।
सोलन अस्पताल में प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में संचालित किया जाएगा। सोलन में डॉ. दीक्षा की निगरानी में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि नालागढ़ अस्पताल में डॉ. मुकेश गर्ग प्रशिक्षण कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं सोलन अस्पताल में डॉ. नीता गौतम सहित अन्य चिकित्सा अधिकारी भी निगरानी करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि पंचकर्म प्रशिक्षण केवल प्रैक्टिकल तक सीमित नहीं रहेगा। अभ्यर्थियों के लिए नियमित कक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें उन्हें आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की सैद्धांतिक जानकारी दी जाएगी। इसके बाद मरीजों के उपचार के दौरान इस ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग सिखाया जाएगा।
प्रशिक्षण के लिए युवाओं में भी काफी उत्साह देखने को मिला है। अधिकारियों का कहना है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। यह प्रशिक्षण युवाओं को पंचकर्म में दक्ष बनाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार आयुर्वेद वात, पित्त और कफ के सिद्धांत पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकता के अनुसार पंचकर्म सहित विभिन्न आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। हालांकि, किसी भी चिकित्सा पद्धति का लाभ लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
सोलन में शुरू होने जा रहा यह पंचकर्म प्रशिक्षण कार्यक्रम आयुर्वेद के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अंतिम चयन सूची और प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत पर सभी की नजरें रहेंगी।
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