नई औद्योगिक नीति तत्काल घोषित करने की मांग, बिजली, परिवहन और ऋण संबंधी रियायतों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा
भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक नीति की अवधि समाप्त होने और नई नीति को लेकर बनी अनिश्चितता पर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने सुक्खू सरकार से नई औद्योगिक नीति तत्काल घोषित करने और उद्योग जगत को स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उद्योग केवल उत्पादन और निवेश का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और युवाओं के रोजगार का आधार भी हैं। ऐसे में औद्योगिक नीति को लेकर समय पर निर्णय नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
करीब 30 हजार उद्योगों पर अनिश्चितता का सवाल
परमार ने कहा कि प्रदेश में लगभग 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग संचालित होने की खबरें सामने आई हैं। औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली बिजली, परिवहन और ऋण संबंधी रियायतें उद्योगों की उत्पादन लागत कम रखने और निवेश को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुरानी नीति की अवधि समाप्त होने के बाद उद्योग जगत नई नीति को लेकर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे में सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
निवेश और रोजगार पर पड़ सकता है असर
भाजपा नेता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। यहां उद्योगों को कच्चे माल की ढुलाई, तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रोत्साहन योजनाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो इसका असर नए निवेश, मौजूदा उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन पर पड़ सकता है।
पुरानी रियायतों और लंबित दावों पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार
विपिन सिंह परमार ने कहा कि सरकार को केवल नई नीति लाने का आश्वासन देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्योग जगत को स्पष्ट समयसीमा और ठोस कार्ययोजना देनी चाहिए।
सरकार यह भी स्पष्ट करे कि पुरानी नीति के तहत स्वीकृत लाभों, लंबित दावों और पात्र उद्योगों को मिलने वाली रियायतों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को भरोसा मिलना चाहिए कि नीतिगत बदलाव के कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
नई नीति के लिए तय हो समयसीमा
परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने से रोकने के लिए स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाना आवश्यक है। सरकार को नए निवेश आकर्षित करने के साथ मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को बनाए रखने पर भी ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, औद्योगिक विकास के लिए समयबद्ध निर्णय, पारदर्शी नीतियां और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि नई औद्योगिक नीति की घोषणा के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए, पुरानी रियायतों और लंबित मामलों पर स्थिति स्पष्ट की जाए तथा उद्योगों और उनसे जुड़े रोजगार को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल अंतरिम व्यवस्था पर विचार किया जाए।
परमार ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस विषय पर सरकार को जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए, ताकि हिमाचल में निवेश का वातावरण मजबूत हो और उद्योग जगत अनिश्चितता के बजाय विश्वास के साथ आगे बढ़ सके।
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