कांग्रेस की ‘वोट बचाओ रैली’ के लिए सरकारी बसों और संसाधनों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल, बोले—जनता की कमाई का हिसाब देना होगा
हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस की प्रस्तावित ‘वोट बचाओ रैली’ के लिए 200 बसें दिल्ली भेजने की खबर को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक विपिन सिंह परमार ने इस मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि दिल्ली रैली के लिए बसों की व्यवस्था पर होने वाला खर्च कौन उठाएगा और क्या इसमें सरकारी बसों, संसाधनों या धन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पालमपुर में जारी बयान में विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता की मेहनत की कमाई का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं होना चाहिए।
यदि कांग्रेस पार्टी अपनी रैली के लिए बसों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कर रही है, तो उसे खर्च का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। वहीं, यदि सरकारी धन या संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है, तो सरकार को उसका पूरा हिसाब देना होगा।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि एक ओर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार चिंताएं सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में राजनीतिक कार्यक्रम के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था करने की खबरें सामने आ रही हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदेश में विकास कार्यों में देरी, संस्थानों की स्थिति और आम जनता की समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक आयोजनों की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों और पेयजल की उपलब्धता, युवाओं के लिए रोजगार तथा कर्मचारियों की लंबित देनदारियों जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहिए।
महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच परिवार अपना बजट संभालने में जुटे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की जरूरतों और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे।
200 बसों के खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किया कि दिल्ली जाने वाली 200 बसों की व्यवस्था किस माध्यम से की जा रही है। उन्होंने बसों के किराये, ईंधन और अन्य खर्चों के भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
परमार ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि बसों का खर्च कांग्रेस पार्टी वहन करेगी या इसके लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि निजी बसें किराये पर ली जा रही हैं, तो उनके भुगतान की व्यवस्था क्या है और यदि सरकारी परिवहन सेवा का उपयोग किया जा रहा है, तो क्या इससे परिवहन व्यवस्था पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यदि रैली का पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी उठा रही है, तो सरकार को यह तथ्य सार्वजनिक करना चाहिए। वहीं, यदि सरकारी धन या संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, तो संबंधित खर्च का पूरा विवरण जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
‘राजनीतिक रैली करना अधिकार, लेकिन खर्च पर पारदर्शिता जरूरी’
विपिन सिंह परमार ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक रैली करना किसी भी राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन इसके लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देना भी जरूरी है। कांग्रेस को दिल्ली में अपनी राजनीतिक आवाज उठाने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की जनता की समस्याओं पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश किसी राजनीतिक दल की निजी जागीर नहीं है। यह किसानों, बागवानों, कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और आम नागरिकों का प्रदेश है। जनता करों और विभिन्न शुल्कों के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देती है। ऐसे में सरकारी धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से करना सरकार की जिम्मेदारी है।
‘जनता के धन का पाई-पाई का हिसाब दे सरकार’
भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि रैली से संबंधित व्यवस्थाओं पर कितना खर्च होगा, भुगतान किसने किया है और खर्च के लिए धन किस मद से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी ने उठाया है, तो उसका विवरण सामने रखा जाए। यदि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है, तो उससे संबंधित खर्च का हिसाब भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रदेश की जनहितकारी आवश्यकताओं के बीच अंतर समझना होगा। हिमाचल की जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहिए। दिल्ली की रैली में कितनी बसें जाएंगी और कितने कार्यकर्ता शामिल होंगे, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि प्रदेश के लोगों की समस्याओं का समाधान कब होगा।
उन्होंने कहा कि जनता के धन का प्रत्येक रुपया जनहित, विकास और आवश्यक सेवाओं पर खर्च होना चाहिए। सरकार को दिल्ली रैली की तैयारियों से जुड़े खर्चों पर उठ रहे सवालों का तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का संदेह न रहे। परमार ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और जनता के धन का पूरा हिसाब देने की मांग की।
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