शिमला।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण के दावों को लेकर एक बार फिर विवादों में घिर गई है। भाजपा विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने टांडा और चमियाना मेडिकल कॉलेजों में स्थापित की गई रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ा घोटाला करार दिया है।
परमार ने आरोप लगाया कि "हाई-टेक" सुविधा के नाम पर पारदर्शिता को ताक पर रखकर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया जा रहा है।
विपिन परमार ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई इन रोबोटिक मशीनों की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किए:
एक विदेशी कंपनी को यह ठेका किन शर्तों पर दिया गया?
टेंडर प्रक्रिया में कुल कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया था?
चयन का आधार क्या था और क्या इसमें नियमों का पालन हुआ?
परमार ने कहा कि इन सवालों पर सरकार की चुप्पी अपने आप में यह सिद्ध करती है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल खेला गया है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने तकनीक की उपयोगिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जो सुविधा जनता के हित के लिए होनी चाहिए थी, वह अब आम आदमी के लिए बोझ बन गई है। जहां सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी 20 से 25 हजार रुपये में हो जाती है, वहीं रोबोटिक सर्जरी का खर्च डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रहा है।
परमार ने सवाल उठाया कि क्या आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाओं के तहत इन महंगी सर्जरी का लाभ मरीजों को मिल रहा है? यदि नहीं, तो बीपीएल और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए इस करोड़ों की मशीन का क्या औचित्य है?
विपिन परमार ने प्रदेश के मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे को 'वेंटिलेटर' पर बताते हुए कहा कि सरकार बुनियादी सुविधाओं के बजाय दिखावे पर ध्यान दे रही है। अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, रेडियोलॉजिस्ट, लैब तकनीशियन और तकनीकी स्टाफ के पद खाली पड़े हैं।प्रदेश के कई अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर तक फंक्शनल नहीं हैं,
जिससे मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में दवाओं के सैंपल फेल होने पर उन्होंने कहा कि जब दवाएं ही मानकों पर खरी नहीं हैं, तो इलाज की गारंटी कैसे दी जा सकती है? आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने स्वास्थ्य बजट में कटौती कर दी है।
विपिन परमार ने मांग की है कि सरकार रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद, लागत और टेंडर से जुड़ी समस्त जानकारी सार्वजनिक करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा तकनीक के विरोध में नहीं है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता "दिखावा" नहीं बल्कि "बुनियादी इलाज" होना चाहिए।
जब तक अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होंगे और सस्ती दवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक ये महंगी मशीनें केवल भ्रष्टाचार का जरिया मात्र हैं। अगर सरकार ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो भाजपा इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में जन-आंदोलन छेड़ेगी।" — विपिन सिंह परमार, भाजपा विधायक