शिमला।
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 'चेस्टर हिल्स' (Chester Hills) प्रोजेक्ट को लेकर छिड़े विवाद पर अब प्रदेश के मुख्य सचिव एवं रेरा (RERA) के पूर्व चेयरमैन संजय गुप्ता ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
प्रोजेक्ट में अनियमितताओं और अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग और प्रशासन द्वारा की गई सभी कार्रवाइयां कानून के दायरे में रहकर की गई हैं।
विवाद का मुख्य कारण
सोलन स्थित चेस्टर हिल्स हाउसिंग प्रोजेक्ट पिछले कुछ समय से विवादों में है। फ्लैट खरीदारों ने बिल्डर पर समय पर पजेशन न देने, निर्माण में खामियों और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में रेरा और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे।
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय गुप्ता ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे और भ्रामक हैं। उन्होंने प्रमुख बिंदु स्पष्ट किए संजय गुप्ता ने कहा कि प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें और स्वीकृतियां पूरी तरह से विधिक प्रक्रिया (Legal Procedure) के तहत दी गई थीं।
इसमें किसी भी स्तर पर किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुँचाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब वह रेरा के पद पर थे, तब भी शिकायतों का निपटारा मेरिट के आधार पर किया गया था।
किसी भी अधिकारी पर दबाव डालने या नियमों को ताक पर रखने की बातें मनगढ़ंत हैं। मुख्य सचिव ने संकेत दिया कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके कार्यकाल के दौरान कोई भी निर्णय व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया।
खरीदारों की बढ़ी मुश्किलें
एक ओर जहाँ प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चेस्टर हिल्स में निवेश करने वाले दर्जनों परिवार आज भी अधर में लटके हैं। खरीदारों का आरोप है कि उन्हें जो सुविधाएं दिखाने का वादा किया गया था, वे जमीन पर मौजूद नहीं हैं और कई तकनीकी खामियों के कारण उनके निवेश पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
क्या है अगला कदम?
इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद अब सरकार और संबंधित विभाग इस प्रोजेक्ट की दोबारा समीक्षा कर सकते हैं। मुख्य सचिव के बचाव में आने के बाद अब गेंद उन जांच एजेंसियों के पाले में है, जो इस प्रोजेक्ट की फाइलों की पड़ताल कर रही हैं।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सबसे अहम है। चेस्टर हिल्स मामले में जो भी निर्णय लिए गए, वे तत्कालीन परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थे।— संजय गुप्ता, मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश