नूरपुर
"हौसलों के तरकश में कोशिशों का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख।" इन पंक्तियों को जिला कांगड़ा के नूरपुर की बेटी वर्षा मनकोटिया ने सच कर दिखाया है।
छोटे से गांव से निकलकर विश्वविद्यालय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल कर वर्षा ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे नेक और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आती।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के दीक्षांत समारोह में उस समय नूरपुर का नाम गौरव से गूँज उठा, जब राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने वर्षा मनकोटिया को स्वर्ण पदक (Gold Medal) से नवाजा।
वर्षा ने द्रोणाचार्य शिक्षण महाविद्यालय, रैत की छात्रा के रूप में बीबीए (सत्र 2022–25) की परीक्षा में पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का लोहा मनवाया।
वर्षा की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे एक अनुशासित और प्रेरणादायक पृष्ठभूमि है। उनके पिता, सुरजीत सिंह, भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि माता सीमा देवी एक कुशल गृहिणी हैं।
एक फौजी पिता की अनुशासनप्रियता और माता के निरंतर प्रोत्साहन ने वर्षा को शैक्षणिक ऊंचाइयों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। इस उपलब्धि की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव 'परगना' में उत्सव का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए वर्षा मनकोटिया ने कहा कि इस मुकाम तक पहुँचने का पूरा श्रेय उनके माता-पिता और शिक्षकों को जाता है। वर्षा के अनुसार, महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन ने उनकी राह आसान की।
उन्होंने अन्य छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि निरंतर प्रयास और खुद पर भरोसे से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनका भविष्य का लक्ष्य और भी बड़ी चुनौतियों को पार कर क्षेत्र का नाम रोशन करना है।
वर्षा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर द्रोणाचार्य शिक्षण महाविद्यालय प्रबंधन ने भी हर्ष व्यक्त किया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वर्षा शुरू से ही एक मेधावी और अनुशासित छात्रा रही है।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर एक बेटी का गोल्ड मेडलिस्ट बनना न केवल नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह प्रदेश की उन हजारों बेटियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।