नगर निगम मंडी चुनाव में नामांकन वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होते ही सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। टिकट वितरण से नाराज कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की अपील को नजरअंदाज करते हुए चुनाव मैदान नहीं छोड़ा। इसका नतीजा यह हुआ कि कई वार्डों में मुकाबला अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि “पार्टी बनाम बागी” के रूप में सामने आ रहा है।
हालांकि बैहना वार्ड के सभी प्रत्याशियों ने नामांकन वापस लेकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में असंतोष खुलकर सामने आया है। इससे दोनों प्रमुख दलों की रणनीति प्रभावित हुई है और संगठन के भीतर नाराजगी भी बढ़ गई है।
बागियों ने बिगाड़े समीकरण
सबसे ज्यादा हलचल वार्ड नंबर-7 तल्याहड़ और वार्ड नंबर-12 भगवाहन में देखने को मिल रही है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के कई असंतुष्ट उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव के बाद अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त कार्रवाई हो सकती है।
वार्ड नंबर-12 भगवाहन में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जहां भाजपा के कई असंतुष्ट उम्मीदवार—दिनेश कुमार, चंद्रशेखर वैद्य और अनिल कपूर—मैदान में हैं। इनके अलावा अधिकृत प्रत्याशी गगन कश्यप और कांग्रेस के जितेंद्र कुमार भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
कई वार्डों में त्रिकोणीय और सीधी टक्कर
सात वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। इनमें वार्ड नंबर-2 पुरानी मंडी, वार्ड नंबर-3 पड्डल, वार्ड नंबर-5 मंगवाई, वार्ड नंबर-6 सन्यारड़, पैलेस कॉलोनी-दो, वार्ड नंबर-10 सुहड़ा और वार्ड नंबर-13 थनेहड़ा शामिल हैं।
वहीं, वार्ड नंबर-4 नेला, वार्ड नंबर-8 पैलेस कॉलोनी-1 और वार्ड नंबर-15 दौहंदी में असंतुष्ट उम्मीदवारों के चलते त्रिकोणीय मुकाबले बन गए हैं। खासतौर पर पैलेस कॉलोनी-1 में भाजपा की असंतुष्ट नेता पुष्पा ठाकुर के मैदान में उतरने से मुकाबला और कड़ा हो गया है।
वार्ड नंबर-1 खलियार में दोनों दलों को कुछ राहत जरूर मिली, जहां असंतुष्ट उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया। वहीं वार्ड नंबर-7 तल्याहड़ में भाजपा को आंशिक राहत मिली है, लेकिन कांग्रेस के बागी उम्मीदवार अब भी मैदान में हैं। वार्ड नंबर-11 समखेतर में भी बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हुआ चुनाव
नगर निगम मंडी का यह चुनाव अब पारंपरिक भाजपा बनाम कांग्रेस मुकाबले से आगे बढ़ चुका है। कई वार्डों में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनाव को और अधिक दिलचस्प और जटिल बना दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार परिणाम केवल पार्टी की ताकत पर नहीं, बल्कि बागियों के प्रभाव और वोटों के बिखराव पर भी निर्भर करेगा। यही वजह है कि मंडी का चुनाव इस बार पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक और चुनौतीपूर्ण बन गया है।
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