मंडी
हिमाचल प्रदेश में नगर निगम और पंचायत चुनावों की गहमागहमी के बीच मंडी नगर निगम के वार्ड नंबर 14 (बैहना) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। लोकतंत्र के इस उत्सव के बीच पूरे वार्ड ने एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया है।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय, सभी प्रत्याशियों ने सामूहिक रूप से अपने नाम वापस ले लिए हैं। इस अभूतपूर्व घटनाक्रम के बाद अब 17 मई को बैहना वार्ड में मतदान नहीं होगा।
बैहना क्षेत्र के निवासियों का विरोध पिछले काफी समय से सुलग रहा था। स्थानीय जनता की स्पष्ट मांग है कि उनके क्षेत्र को नगर निगम के दायरे से बाहर कर पुनः ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में नगर निगम का हिस्सा होने के बावजूद क्षेत्र में विकास के नाम पर कोई काम नहीं हुआ। लोगों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों और प्रशासनिक कार्यों के लिए बार-बार मंडी शहर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
टैक्स के बोझ और सुविधाओं के अभाव पर फूटा गुस्सा
विकास कार्यों की कमी के साथ-साथ आर्थिक बोझ ने भी जनता के आक्रोश को हवा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व सरकार ने आश्वासन दिया था कि पांच वर्षों तक गृह एवं संपत्ति कर (House Tax) में छूट दी जाएगी, लेकिन महज तीन साल के भीतर ही टैक्स की वसूली शुरू कर दी गई।
स्थानीय निवासियों का तर्क है कि जब उन्हें शहरी सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं, तो वे भारी भरकम शहरी करों का भुगतान क्यों करें? इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने एक संघर्ष समिति का गठन किया था।
राजनीतिक दलों को मिली 'विधानसभा चुनाव' की चेतावनी
ग्रामीण संघर्ष समिति ने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों को दो टूक चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने चुनाव लड़ा, तो इसका खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना होगा।
जनता के इस कड़े रुख और दबाव को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी गुरबचन सिंह, कांग्रेस के धनदेव, भाजपा के बागी कृष्ण भानु और निर्दलीय मनसा राम ने आपसी सहमति से अपने कदम पीछे खींच लिए। जनता की एकजुटता के आगे राजनीतिक दलों की एक न चली और मैदान पूरी तरह खाली हो गया।
अब केवल 14 वार्डों में होगा चुनावी रण
बैहना वार्ड में किसी भी प्रत्याशी के न होने के कारण अब मंडी नगर निगम के शेष 14 वार्डों में ही मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। बैहना का यह सामूहिक बहिष्कार प्रशासन और प्रदेश सरकार के लिए एक गंभीर संदेश है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों के विस्तार में ग्रामीण भावनाओं की अनदेखी भविष्य में ऐसी और भी चुनौतियों को जन्म दे सकती है। फिलहाल, बैहना वार्ड का यह निर्णय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।