शिमला
छौहारा विकास खंड की ग्राम पंचायत तांगणू-जांगलिख में वृद्धावस्था पेंशन के वितरण में कथित धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में परिवार रजिस्टर की नकल से लेकर तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय द्वारा की गई सिफारिशों तक, पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने इसका कड़ा संज्ञान लिया है।
मुख्यमंत्री के कड़े तेवर, निष्पक्ष जांच के आदेश
पेंशन नियमों की अनदेखी और अपात्रों को लाभ पहुँचाने की खबरों के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को पूरे मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया है। निदेशक ई-सोमसा ने जिला कल्याण अधिकारी को एक निश्चित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
जांच के घेरे में मुख्य रूप से तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका को रखा गया है। आरोप है कि पेंशन स्वीकृति के लिए आधार माने जाने वाले 'परिवार रजिस्टर की नकल' को तैयार करने में नियमों की अनदेखी की गई।
विभागीय टीम अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि परिवार रजिस्टर की नकल किस आधार पर और किन दस्तावेजों को देखकर बनाई गई? क्या लाभार्थियों की आयु और पात्रता का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया गया था? क्या दस्तावेजों में कोई जानबूझकर हेराफेरी की गई है?
रिकॉर्ड खंगालने में जुटा विभाग, FIR की तैयारी
जिला कल्याण अधिकारी के नेतृत्व में टीम लगातार रिकॉर्ड खंगाल रही है और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। सूत्रों के अनुसार, यदि दस्तावेजों में नियमों का उल्लंघन या जालसाजी प्रमाणित होती है, तो संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज करवाई जा सकती
है। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों के भीतर इस दिशा में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप
मामला सामने आने के बाद से ही तहसील और जिला कल्याण अधिकारी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच टीम इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि तहसील स्तर पर बिना सही वेरिफिकेशन के पेंशन की सिफारिश कैसे की गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकार के नियमों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।