शिमला
पहाड़ों की रानी शिमला में कुदरत के बदलते मिजाज ने पिछले दो दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मई के महीने में जहाँ उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में होता है, वहीं शिमला में अधिकतम तापमान 18°C से 21°C के बीच सिमट गया है।
इससे पहले साल 2007 में मई के दौरान इतनी ठंड महसूस की गई थी जब पारा 26°C तक पहुँचा था, लेकिन इस बार की ठंड ने 19 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बुधवार को रोहतांग दर्रा और ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी ने पूरी घाटी में सिहरन पैदा कर दी है।
मौसम विभाग के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। मई के शुरुआती छह दिनों में ही हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 28% अधिक बारिश दर्ज की गई है। बिलासपुर, सिरमौर और ऊना जैसे जिलों में तो बारिश का स्तर सामान्य से 300% से भी अधिक रहा है।
जहाँ एक ओर शिमला और सोलन जैसे जिलों में बादल जमकर बरसे हैं, वहीं दूसरी ओर लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है, जो राज्य के भीतर मौसम की भारी असमानता को दर्शाता है।
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। कुल्लू की सैंज घाटी और लाहौल के निचले इलाकों में भारी ओलावृष्टि के कारण सेब, आडू, मटर और गेहूं की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है।
ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरी घाटी बर्फ की चादर की तरह सफेद हो गई, जिससे फलदार वृक्षों के फूलों और कलियों को अपूरणीय क्षति हुई है।
आने वाले दिनों के लिए मौसम विभाग ने मिश्रित पूर्वानुमान जारी किया है। 7 मई को प्रदेश के आठ मध्य और उच्च पर्वतीय जिलों में अंधड़ और बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि, 8 से 10 मई के बीच मौसम साफ रहने और धूप खिलने से तापमान में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे लोगों को ठंड से राहत मिल सकती है।
लेकिन यह राहत अल्पकालिक होगी, क्योंकि 11 और 12 मई को एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से दोबारा बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।