कुल्लू
हिमाचल प्रदेश में जहाँ पंचायतीराज चुनावों को लेकर गाँवों की गलियों में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है, वहीं कुल्लू जिले के आनी विकास खंड की नवगठित तांदी पंचायत ने एकता और सौहार्द की एक नई इबारत लिख दी है। इस पंचायत ने चुनावी शोर-शराबे से दूर रहते हुए आपसी सहमति से अपना मुखिया चुन लिया है, जो पूरे जिले के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गया है।
संजीव कुमार के सिर सजा निर्विरोध ताज
नवगठित तांदी पंचायत के ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण बैठक कर सामूहिक रूप से संजीव कुमार को निर्विरोध प्रधान चुनने का निर्णय लिया। कफ्टा गाँव के निवासी संजीव कुमार की साफ छवि, सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ग्रामीणों ने उन पर भरोसा जताया है।
ग्रामीणों का मानना है कि संजीव के नेतृत्व में नई पंचायत विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगी।
वार्ड सदस्यों पर भी बनी सहमति
केवल प्रधान ही नहीं, बल्कि पंचायत के दो वार्डों में भी चुनावी मुकाबला खत्म कर दिया गया है वार्ड नंबर 4 से रंजना देवी को निर्विरोध चुना गया। वार्ड नंबर 5 से दिनेश कुमार के नाम पर सर्वसम्मति बनी। पंचायत के अन्य तीन वार्ड सदस्यों और उपप्रधान पद के लिए भी ग्रामीणों ने जल्द ही बैठक कर सर्वसम्मति बनाने का लक्ष्य रखा है, ताकि पूरी पंचायत निर्विरोध चुनी जा सके।
तांदी पंचायत की इस एकजुटता के पीछे विकास की एक बड़ी सोच भी काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों के लिए प्रोत्साहन राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया है।
यदि तांदी पंचायत शेष पदों पर भी निर्विरोध चयन करने में सफल रहती है, तो उसे सरकार की ओर से यह भारी-भरकम राशि मिलेगी, जिसका उपयोग क्षेत्र की सड़कों, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जा सकेगा।
जिले में पेश किया पहला उदाहरण
इस चुनावी सत्र में जिला कुल्लू से यह पहला मामला सामने आया है जहाँ प्रतिनिधियों का चयन बिना किसी विरोध के हुआ है। तांदी पंचायत के इस फैसले ने न केवल चुनावी रंजिशों को खत्म किया है, बल्कि आपसी भाईचारे का संदेश भी दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में खर्च होने वाले समय और धन को बचाकर यदि उसे विकास में लगाया जाए, तो गाँव की तस्वीर बदल सकती है।