हमीरपुर
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के पेंशनरों में समय पर पेंशन न मिलने और लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। हमीरपुर बस अड्डा परिसर में आयोजित 'हिमालय परिवहन सेवा निवृत कर्मचारी कल्याण मंच' की मासिक बैठक में पेंशनरों ने सरकार और निगम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया।
बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान नन्द लाल चौहान ने की, जबकि प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पेंशन और भत्तों में देरी से गहराया आर्थिक संकट
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर ठाकुर ने आरोप लगाया कि परिवहन पेंशनरों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मार्च माह की पेंशन अभी तक कई पेंशनरों के खातों में नहीं पहुँची है, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों को अपना घर चलाने और दवाइयों का खर्च उठाने में भारी कठिनाई हो रही है।
ठाकुर ने बताया कि ऊना में उप मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अप्रैल की पेंशन के साथ 3% महंगाई भत्ता (DA) देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं।
जुलाई 2025 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों का GPF भी फंसा
मंच ने गंभीर आरोप लगाया कि जुलाई 2025 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के साथ अन्याय की सीमा पार हो गई है। सेवानिवृत्ति के कई महीने बीत जाने के बाद भी इन कर्मचारियों को अब तक उनका GPF (General Provident Fund) तक जारी नहीं किया गया है।
पेंशनर नेताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार के मंत्री मीडिया में बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी अपने हक के पैसे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए अजमेर ठाकुर ने चेतावनी दी कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से पेंशनर समाज को केवल आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही पेंशन अदायगी का स्थायी समाधान नहीं हुआ और लंबित बकाये का भुगतान नहीं किया गया,
तो प्रदेश भर के पेंशनर आगामी पंचायत चुनावों में वर्तमान सरकार के उम्मीदवारों का डटकर विरोध करेंगे और उनके खिलाफ मतदान करेंगे।
आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार की इस अनदेखी के खिलाफ जल्द ही 'एचआरटीसी पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति' की एक आपात बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में प्रदेश स्तर पर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। पेंशनरों ने स्पष्ट किया है कि अब वे आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं और अपने हक की लड़ाई को सड़कों पर लड़ने के लिए तैयार हैं।