राजधानी शिमला के खलीनी क्षेत्र में स्थित वन विभाग के सरकारी भवन में कैंटीन की अनुमति के बावजूद कथित तौर पर राशन, सब्जी और जनरल स्टोर जैसी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर सरकारी भवन के उपयोग और आवश्यक मंजूरियों पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों की सुविधा के लिए कैंटीन खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन भवन में अब रोजमर्रा के सामान की दुकानें भी चल रही हैं। आरोप है कि इन दुकानों को किराये पर दिया गया है।
विभागीय रिकॉर्ड में पहले ही जताई गई थी आपत्ति
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 9 जनवरी 2026 को प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन एवं वित्त) कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया था कि विभागीय परिसर में कर्मचारियों की सुविधा के लिए नियमों के तहत केवल कैंटीन संचालित की जा सकती है।
पत्र में कहा गया था कि कैंटीन का उद्देश्य कर्मचारियों को:
चाय-नाश्ता,
सीमित खाद्य सामग्री
उपलब्ध करवाना है। वहीं जनरल स्टोर, राशन दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सरकारी भवन के उद्देश्य के अनुरूप नहीं हैं।
पत्र में नगर निगम अधिनियम और अन्य सरकारी नियमों का हवाला देते हुए कहा गया था कि सरकारी भवन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए उसे बनाया या आवंटित किया गया है।
नियमों की अनदेखी पर जिम्मेदारी तय करने की बात
विभागीय पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि इन निर्देशों की अनदेखी कर जनरल स्टोर या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाती हैं और भविष्य में कोई कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी भवन के उपयोग में किसी भी तरह के बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और आवश्यक मामलों में वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी होती है। किसी अधिकारी को अपने स्तर पर सरकारी भवन को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं होता।
सरकारी भवन के उपयोग पर उठे सवाल
मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब विभागीय रिकॉर्ड में पहले ही ऐसी गतिविधियों पर आपत्ति दर्ज थी, तो फिर सरकारी भवन में व्यावसायिक दुकानें किस आधार पर संचालित की जा रही हैं।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन एवं वित्त) कार्यालय से जुड़े अधिकारी डॉ. संजय सूद ने इसे प्रशासनिक मामला बताते हुए इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
विभाग का दावा- कर्मचारियों की सुविधा के लिए लगाए गए टेंडर
वहीं, मुख्य अरण्यपाल (वन) के. तिरुमल ने कहा कि कर्मचारियों की सुविधा के लिए दुकानों के संचालन को लेकर बाकायदा टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार इसके लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं।
उन्होंने कहा कि हर मामले में वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी नहीं होती और यह व्यवस्था कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की गई है।
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