पालमपुर, 16 जून 2026। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि नई पीढ़ी में नशे का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह एक गंभीर संकट बन चुका है, जो युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार में भारी मुनाफा होने के कारण इसका व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ सराहनीय अभियान शुरू किया है। विशेष रूप से सरकारी विभागों में भर्ती के दौरान डोप टेस्ट को अनिवार्य बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है और नशे के कारोबार से जुड़ी करीब 51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा 123 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि 31 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। उन्होंने पंचायतों के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को नशे के खिलाफ शपथ दिलाने के लिए भी मुख्यमंत्री की सराहना की।
उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि नशे जैसी गंभीर समस्या से केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर लड़ना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री प्रदेश की सभी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं की बैठक बुलाकर इस विषय पर व्यापक चर्चा करें और सभी के सुझावों के आधार पर एक व्यापक जनजागरण कार्यक्रम तैयार किया जाए।
शांता कुमार ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि भविष्य में सभी प्रकार के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत और शहरी निकाय चुनावों से पहले ऐसा नियम लागू होता, तो इससे बड़ा सकारात्मक संदेश जाता।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ हिमाचल सरकार की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए पूरे समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।