मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सराज विधानसभा क्षेत्र के गांव छड़यान्द निवासी सुरेश कुमार को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद कर दी गई।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब आर्थिक तंगी से जूझ रहा पीड़ित परिवार पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से मिलने उनके तांदी स्थित आवास पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई।
सुरेश कुमार की पत्नी सायना देवी ने बताया कि करीब नौ वर्ष पहले पेड़ से गिरने के बाद उनके पति की रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो गया था। लंबे समय तक जोनल अस्पताल मंडी, मेडिकल कॉलेज नैरचौक, पीजीआई चंडीगढ़ और शिमला समेत कई अस्पतालों में इलाज करवाने के बावजूद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
आज उनकी स्थिति ऐसी है कि वह पूरी तरह बिस्तर पर हैं, हाथ-पैर काम नहीं करते और वह बोलने की क्षमता भी खो चुके हैं। लंबे इलाज ने परिवार को कर्ज के बोझ तले दबा दिया है।
पूर्व भाजपा सरकार के दौरान शुरू की गई मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत सुरेश कुमार को हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही थी, जिससे दवाइयों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलाने में मदद मिलती थी।
हालांकि वर्तमान कार्यकाल में उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर योजना का लाभ बंद कर दिया गया। जब परिवार ने जयराम ठाकुर के समक्ष लिखित शिकायत रखी तो उन्होंने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो व्यक्ति उनके सामने जीवित बैठा है, उसे सरकारी तंत्र ने कागजों में मृत घोषित कर दिया है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से तुरंत बात कर त्रुटि सुधारने और सहारा योजना का लाभ बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने अपनी ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की और भविष्य में इलाज तथा बच्चों की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
वहीं उनकी धर्मपत्नी एवं भारतीय रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की राष्ट्रीय सदस्य डॉ. साधना ठाकुर ने मरीज के लिए एक एयरबेड उपलब्ध करवाने की घोषणा की। इस घटना ने सरकारी कार्यप्रणाली और लाभार्थियों के सत्यापन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।