धर्मशाला का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब केवल खेल प्रतियोगिताओं का केंद्र नहीं रहा, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक प्रभावी मंच बन गया है।
हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के दौरान एचपीसीए द्वारा प्रस्तुत लेजर शो, ड्रोन प्रदर्शन और लाइट एंड साउंड शो ने दर्शकों को हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। इस प्रस्तुति का प्रसारण विश्वभर में हुआ, जिससे देवभूमि की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिली।
धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में बसे इस स्टेडियम ने पिछले दो दशकों में हिमाचल के पर्यटन को नई दिशा दी है। आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान यहां आने वाले हजारों पर्यटक न केवल क्रिकेट का आनंद लेते हैं, बल्कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता से भी प्रभावित होते हैं।
हालिया कार्यक्रम में कुल्लू दशहरा, देवी-देवताओं की परंपराएं, वीरभूमि हिमाचल की गौरवगाथा, साहसिक खेलों और वन्यजीवन की झलक को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
वर्ष 2005 में जिस स्टेडियम की परिकल्पना की गई थी, वह आज विश्व के सबसे खूबसूरत क्रिकेट मैदानों में शुमार है। एचपीसीए के माध्यम से पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा शुरू किया गया यह प्रयास अब हिमाचल की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
खेल गतिविधियों के साथ-साथ यह स्टेडियम प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति और युवाओं की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।