शिमला।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने शनिवार को अपने कार्यकाल का चौथा बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट का मुख्य फोकस छोटे तबके और ग्रामीण इलाकों पर राहत देने, गांवों के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर रहा।
सीमित संसाधनों और केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के मद्देनजर कुल बजट ₹54,928 करोड़ पेश किया गया। वित्त वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्तियां ₹40,361 करोड़ और कुल राजस्व व्यय ₹46,938 करोड़ रहने का अनुमान है, जिससे राजस्व घाटा ₹6,577 करोड़ और वित्तीय घाटा ₹9,698 करोड़ यानी प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.49% अनुमानित है।
वित्तीय अनुशासन के तहत मुख्यमंत्री ने अपने, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में अस्थायी कटौती की घोषणा की। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के वेतन का 50%, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों का 30% तथा विधायकों का 20% अगले छह महीनों के लिए स्थगित किया जाएगा।
मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों का 20-30% वेतन अस्थायी रूप से स्थगित रहेगा। पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का भी वेतन 20-30% तक अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा।
इसके साथ ही, ग्रुप-ए और ग्रुप-बी कर्मचारियों का 3% वेतन अगले छह महीनों के लिए अस्थायी रूप से डेफर किया जाएगा, जबकि ग्रुप-सी और डी कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलेगा। बोर्ड, निगम, पीएसयू, विश्वविद्यालय और सरकार से ग्रांट पाने वाली संस्थाओं को भी इसी दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। पेंशन में किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कटौती केवल अस्थायी है और जैसे ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, यह राशि वापस दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बजट “गांव पर केंद्रित” है और इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में विकास, रोजगार और छोटे तबके की आय को बढ़ाना है।
कहाँ खर्च होगा सरकार का पैसा
बजट के अनुसार प्रति 100 रुपये व्यय में से 27 रुपये वेतन पर, 21 रुपये पेंशन पर, 13 रुपये ब्याज अदायगी पर, 9 रुपये ऋण अदायगी पर, 10 रुपये स्वायत्त संस्थानों को अनुदान पर और शेष 20 रुपये पूंजीगत कार्यों और अन्य गतिविधियों पर खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए कोई कटौती नहीं की गई है। इसके साथ ही लोक निर्माण, जल शक्ति और अन्य महत्वपूर्ण विभागों का बजट भी नहीं काटा गया है।