कांगड़ा।
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। क्या बारिश और क्या कड़ाके की ठंड—माता के भक्तों का उत्साह किसी भी बाधा से कम होता नहीं दिख रहा है। पिछले दो दिनों से जिले में हो रही लगातार बारिश के बावजूद, शनिवार को भी हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर मां के दिव्य दर्शन किए।
ज्वालामुखी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ अन्य मंदिरों की तरह कोई प्रतिमा (मूर्ति) नहीं है। यहाँ पृथ्वी के गर्भ से नौ प्राकृतिक ज्योतियां अनादि काल से प्रज्ज्वलित हैं, जिन्हें साक्षात देवी का रूप माना जाता है।
मंदिर के पुजारी अवनींद्र शर्मा ने बताया ज्वालामुखी हिमाचल का एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है जहाँ मूर्ति पूजा नहीं, बल्कि ज्योति पूजा होती है। इसका वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है।
यहाँ की अखंड ज्योति का विशेष आध्यात्मिक महत्व है और कई श्रद्धालु इसे आशीर्वाद स्वरूप अपने साथ घर भी ले जाते हैं। पड़ोसी राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रशासन की उचित व्यवस्थाओं की सराहना की।
भक्ति और शक्ति का संगम
मंदिर परिसर सुबह से ही "जय माता दी" के जयकारों से गुंजायमान रहा। स्थानीय निवासी संजीव कुमार (माझीन) ने कहा कि नवरात्रि के दौरान यहाँ का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो जाता है, जो जीवन में नई ऊर्जा भर देता है। पुजारी जी के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन मौसम संतुलित रहता है और माता की कृपा से देश-विदेश के कोने-कोने से भक्त यहाँ अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँचते हैं।