शिमला ।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने अपना चौथा बजट 2026-27 पेश करते हुए किसानों और पशुपालकों को सीधा आर्थिक लाभ देने वाली कई बड़ी घोषणाएं कीं। इस बजट का मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और बिचौलियों की भूमिका को कम करना है।
सबसे अहम घोषणा डेयरी क्षेत्र से जुड़ी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वित्त वर्ष से गाय के दूध का क्रय मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया जाएगा।
इससे पहले भी सरकार लगातार दूध के दाम बढ़ाती रही है, जिससे साफ है कि डेयरी सेक्टर को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है । इस बढ़ोतरी से लाखों पशुपालकों की आय में सीधा इजाफा होगा और उन्हें हर लीटर पर अधिक लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही दूध उत्पादकों को मिलने वाला इंसेंटिव भी 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ सीधे उनके खातों में मिले और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।
डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार, Bulk Milk Cooler पर 65% सब्सिडी और A2 दूध की ब्रांडिंग जैसी योजनाएं भी इस दिशा में अहम कदम हैं।
कृषि क्षेत्र में भी किसानों को बड़ी राहत दी गई है। कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। गेहूं का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का 40 से 50 रुपये, जौ 60 से 80 रुपये और हल्दी 90 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है,
जबकि अदरक के लिए पहली बार 30 रुपये प्रति किलोग्राम MSP तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और खेती को लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने “हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग” के गठन की भी घोषणा की है, जो किसानों की समस्याओं के समाधान, नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन और कृषि सुधारों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही “बीज गांव” योजना के तहत पारंपरिक बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें किसानों को सब्सिडी और गांवों को इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता मिलेगी।
पशुपालकों और पारंपरिक चरवाहा समुदायों के लिए 300 करोड़ रुपये की ‘PEHEL’ योजना शुरू की जाएगी, जिससे गद्दी, गुज्जर और किन्नौरा जैसे समुदायों के हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा। ऊन के MSP को 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय करना भी उनके लिए बड़ा सहारा होगा।
मत्स्य क्षेत्र में भी राहत देते हुए मछलियों पर रॉयल्टी 7.5% से घटाकर 1% कर दी गई है, जिससे मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा। वहीं पोल्ट्री, डेयरी और कृषि नवाचार के लिए भी कई योजनाएं लागू की जाएंगी, जिनसे रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हमीरपुर के बड़ा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा और हाइड्रोपोनिक खेती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
राज्य में 400 डेयरी फार्मिंग इकाइयां स्थापित की जाएंगी और 600 लाभार्थियों को सेवा क्षेत्र में सहायता दी जाएगी। फार्म मशीनरी के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता 50:50 लागत साझेदारी के आधार पर दी जाएगी। “मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना” के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।