हिमाचल प्रदेश बजट 2026-27 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, किसानों की आय बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। इस बजट में डेयरी, कृषि, बागवानी, वन, मत्स्य और कमजोर वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है, जिससे प्रदेश के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र में किसानों को बड़ी राहत देते हुए कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। गेहूं का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये, पांगी घाटी के जौ का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और हल्दी का MSP 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम
किया गया है। अदरक के लिए पहली बार 30 रुपये प्रति किलोग्राम MSP तय किया गया है।
बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “बीज गांव” योजना शुरू की जाएगी, जिसमें 50 से 100 किसान पारंपरिक बीज उत्पादन करेंगे। उत्पादकों को प्रति बीघा 5000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी, जबकि प्रत्येक गांव को 2 लाख रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर अनुदान प्रदान किया जाएगा।
साथ ही “हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग” का गठन किया जाएगा, जो किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के तहत सरकार ने डेयरी सहकारी समितियों की संख्या को दोगुना कर 2000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाले Bulk Milk Cooler तथा दूध संग्रहण के लिए खरीदे जाने वाले 10 वाहनों पर 65 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।
A2 दूध की टेस्टिंग व ब्रांडिंग कर इसे हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के माध्यम से 100 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदने की व्यवस्था की जाएगी।
दूध उत्पादकों को राहत देते हुए मिल्क इंसेंटिव को DBT के माध्यम से 3 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जिससे किसानों को प्रति लीटर 3 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा सहित अन्य समुदायों के 40 हजार से अधिक परिवारों को सशक्त बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये की लागत से ‘PEHEL’ (Pastoralists Empowerment in Himalayan Ecosystems for Livelihood) योजना शुरू की जाएगी।
पशु संख्या और चराई क्षेत्र से संबंधित पाबंदियों में उचित छूट देने पर भी विचार किया जाएगा। ऊन के लिए वैज्ञानिक प्रोसेसिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी और Market Stabilization Scheme के तहत ऊन का MSP 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है।
पोल्ट्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 62 करोड़ रुपये की लागत से ‘Himachal Integrated Commercial Poultry Scheme (CHIC)’ लागू की जाएगी। गो-संरक्षण और बेसहारा पशुओं के पुनर्वास को भी प्राथमिकता दी गई है।
मत्स्य क्षेत्र में मछुआरों को बड़ी राहत देते हुए जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर रॉयल्टी 7.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे उन्हें 6.5 प्रतिशत की सीधी राहत मिलेगी। साथ ही “मुख्यमंत्री मछली मछुआरा सहायता योजना” भी शुरू की जाएगी।
कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हमीरपुर के बड़ा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा और हाइड्रोपोनिक खेती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। राज्य में 400 डेयरी फार्मिंग इकाइयां स्थापित की जाएंगी और 600 लाभार्थियों को सेवा क्षेत्र में सहायता दी जाएगी।
फार्म मशीनरी के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता 50:50 लागत साझेदारी के आधार पर दी जाएगी। “मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना” के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।