मंडी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर करारा हमला बोला है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जमवाल ने सरकार की 'रोबोटिक सर्जरी' योजना को केवल एक प्रचार स्टंट करार देते हुए कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज आज आधुनिक सुविधाओं के अभाव में केवल "रेफरल सेंटर" बनकर रह गए हैं।
राकेश जमवाल ने कहा कि जब सदन के भीतर सरकार से रोबोटिक सर्जरी की मशीनों की खरीद, टेंडर प्रक्रिया और स्टाफ के प्रशिक्षण के बारे में सवाल पूछा गया, तो सरकार का जवाब था— "सूचना एकत्रित की जा रही है।"
> "यह जवाब सिद्ध करता है कि सरकार बिना किसी तैयारी के केवल बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही है। अगर मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और टेंडर हो चुके हैं, तो सरकार डेटा देने से क्यों बच रही है?" — राकेश जमवाल, मुख्य प्रवक्ता भाजपा
मंडी मेडिकल कॉलेज: सुविधाओं का अकाल
जमवाल ने मंडी के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज (SLBSGMC) की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार एमआरआई, कैथ लैब और आधुनिक उपकरणों की बात करते हैं, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है।
मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिलने के बजाय तुरंत बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। जहां रेडियोलॉजी विभाग सुचारू नहीं हैं और डॉक्टरों की भारी कमी है, वहां रोबोटिक सर्जरी की बात करना जनता के साथ मजाक है।
आम आदमी की पहुंच से बाहर होगी तकनीक?
विधायक ने रोबोटिक सर्जरी की लागत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पहले से ही लैप्रोस्कोपिक सर्जरी महंगी है, तो रोबोटिक सर्जरी का खर्च गरीब और मध्यम वर्ग कैसे उठा पाएगा? उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस महंगी तकनीक का लाभ आम जनता को मिल पाएगा या यह केवल कागजों तक सीमित रहेगी।
हिमकेयर और देनदारियों पर घेरा
जमवाल ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक तरफ सरकार 'हिमकेयर' जैसी जनकल्याणकारी योजना को बंद करने पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों की देनदारियां अस्पतालों पर बकाया हैं। उन्होंने आईजीएमसी शिमला से डॉक्टरों के स्थानांतरण पर भी चिंता जताई और कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है।