शिमला।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना में घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री जिसे 'पुरुषों का गर्भाशय ऑपरेशन' बता रहे हैं, वह असल में कैंसर के इलाज की एक तकनीकी प्रक्रिया है।
जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता के दौरान तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि हिमकेयर योजना के तहत कैंसर के मरीजों का भी मुफ्त इलाज किया जाता है। कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ विशेष दवाओं और प्रोटोकॉल को मेडिकल कोडिंग में "ओवरी डिजीज" पैकेज के तहत दर्ज किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने तकनीकी शब्दावली को समझने में गलती की और इसे पुरुषों के ओवरी ऑपरेशन का मामला बताकर सनसनी फैलाने की कोशिश की। यह न केवल योजना बल्कि प्रदेश के काबिल चिकित्सकों को भी बदनाम करने का दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार द्वारा बताए जा रहे घोटाले के आंकड़ों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कभी मीडिया में 1100 करोड़, कभी सदन में 100 करोड़ तो कभी 120 करोड़ के घोटाले की बात करते हैं। यह विरोधाभास दर्शाता है कि सरकार के पास कोई ठोस सबूत नहीं है और वह केवल इसलिए इस योजना को बंद करना चाहती है क्योंकि इसे भाजपा सरकार ने शुरू किया था।
जयराम ठाकुर ने वर्तमान सरकार के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में आई गिरावट पर भी चिंता जताई देहरा अस्पताल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ सर्जन तो हैं, लेकिन 2022 से ओटी असिस्टेंट (OTA) के पद खाली पड़े हैं, जिससे सर्जरी ठप है।
कोविड काल में नियुक्त किए गए वार्ड बॉय, नर्स और फार्मासिस्टों को सत्ता में आते ही निकाल दिया गया। जयराम ने उन्हें तुरंत बहाल करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल कॉलेजों के लिए जिस बजट का श्रेय राज्य सरकार ले रही है, वह वास्तव में केंद्र के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मिला फंड है।
एक तरफ सरकार रोबोटिक सर्जरी की हवा-हवाई बातें कर रही है, और दूसरी तरफ अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और पैरामेडिकल स्टाफ का अकाल है। हिमकेयर को बंद करना प्रदेश के गरीब मरीजों के साथ सरासर अन्याय है। — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
जयराम ठाकुर ने साफ कर दिया है कि भाजपा हिमकेयर योजना को बंद करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे अपनी गलती स्वीकार करें और तकनीकी तथ्यों के आधार पर जनता के सामने सही तस्वीर पेश करें।