सोलन I
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में एक दुखद घटना सामने आई है। विश्वविद्यालय परिसर में स्थित डेयरी फार्म के पास बने एक गहरे जल भंडारण टैंक में डूबने से बीएससी ऑनर्स (बागवानी) के चौथे वर्ष के एक होनहार छात्र की जान चली गई। मृतक की पहचान मंजीत जायसवाल निवासी वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स मीट का आयोजन चल रहा था। अधिकांश छात्र और शिक्षक मैच देखने में व्यस्त थे। इसी दौरान मंजीत हॉस्टल से टहलते हुए डेयरी के पास स्थित इस 12 फीट ऊंचे टैंक के पास पहुंचा। बताया जा रहा है कि मंजीत टैंक की दीवार पर चढ़ गया, जहां से पैर फिसलने के कारण वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा।
इस हादसे ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं यह टैंक वर्ष 2007 में बनाया गया था। सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला यह विशाल टैंक पिछले 17 वर्षों से ऊपर से पूरी तरह खुला है।
टैंक की ऊंचाई लगभग 12 फीट है, लेकिन उस पर चढ़ने के लिए न तो सीढ़ियां हैं और न ही दीवार इतनी चौड़ी है कि कोई सुरक्षित खड़ा हो सके। हादसे के वक्त मंजीत के साथ मौजूद एक अन्य छात्र के पास मोबाइल फोन नहीं था।
उसने तुरंत विवि प्रशासन को सूचित किया, लेकिन टैंक की ऊंचाई और उस पर चढ़ने का कोई सहारा न होने के कारण बचाव कार्य में काफी समय लग गया। जब तक मंजीत को बाहर निकाला गया, उसकी मौत हो चुकी थी।
मंजीत जायसवाल की मौत से विश्वविद्यालय में शोक की लहर है। वह एक अत्यंत होनहार छात्र था, जिसका चयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) कोटे के तहत राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हुआ था। वह अपनी डिग्री के अंतिम वर्ष में था।
सोलन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या विवि प्रशासन की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। परिसर में मौजूद अन्य छोटे टैंक ढके हुए हैं, तो फिर इस 12 फीट गहरे और ऊंचे टैंक को इतने वर्षों से खुला क्यों छोड़ा गया? क्या इस होनहार छात्र की जान बचाई जा सकती थी?