संजौली, भट्टाकुफर और ढली में 13-14 इमारतों में बड़ी दरारों का दावा, निर्माण कार्य पर उठे सवाल; डीसी ने काम रोकने के आदेश दिए
शिमला के संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण के कारण मकानों में दरारें आने का मामला सामने आया है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने निर्माण कार्य से अपने घरों को हो रहे नुकसान और भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका को लेकर चिंता जताई है।
मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मिला और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
शांति विहार वार्ड के प्रतिनिधिमंडल ने पार्षद विनीत शर्मा और कमला नगर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित लोगों की सुरक्षा और मकानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा मंत्री के सामने रखा।
प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात कर मामले में सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की मांग रखने वाला है।
लोगों को मकानों की सुरक्षा की चिंता
शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा, कमला नगर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर और पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान ने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि टनल निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि आसपास के मकानों और उनमें रहने वाले लोगों को किसी तरह का खतरा न हो।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने निर्माण कंपनी से भी अपील की है कि टनल निर्माण के दौरान सभी निर्धारित मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए। साथ ही, जिन भवनों को निर्माण कार्य के कारण नुकसान पहुंचा है, उन्हें अधिग्रहित कर प्रभावित लोगों को नुकसान की भरपाई करने की मांग भी उठाई गई है।
संजौली क्षेत्र के लोगों की मुख्य चिंता यह है कि टनलिंग का काम आगे बढ़ने के साथ उनके मकानों को और नुकसान न पहुंचे। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और कमाई से बनाए गए उनके घरों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में निर्माण कार्य के कारण पैदा हुई स्थिति का स्थायी समाधान निकालने की मांग की जा रही है।
13 से 14 इमारतों में बड़ी दरारों का दावा
मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि टनल निर्माण से प्रभावित इलाकों में घरों में दरारें और खतरे की स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्रों में कई घरों में बड़ी दरारें आई हैं। मंत्री के अनुसार करीब 13 से 14 इमारतों में बड़ी दरारें आई हैं और प्रभावित मकानों के कभी भी गिरने का खतरा है।
अनिरुद्ध सिंह ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में सब-स्टैंडर्ड काम किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एनएचएआई के अधिकारियों को हिमाचल के हितों और लोगों की जान-माल की परवाह नहीं है और वे केवल कंपनियों को फायदा पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
डीसी ने निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। इसके बाद फिलहाल निर्माण कार्य के लिए दी गई परमिशन वापस ले ली गई है और काम रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
निर्माण कार्य रुकने के बाद अब प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि मकानों में आई दरारों और टनल निर्माण के बीच संबंध की तकनीकी स्तर पर जांच होगी। साथ ही, लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुख्य सचिव के साथ इस मामले को लेकर उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और संबंधित अधिकारियों को शामिल कर हाई पावर कमेटी का गठन किया जाएगा।
मंत्री ने सुझाव दिया कि कमेटी की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या जज को दी जानी चाहिए। उनके अनुसार इससे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सकेगी और निर्माण कार्य से हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में मकानों में आई दरारों का मामला गंभीर बना हुआ है। स्थानीय लोग अपने घरों की सुरक्षा और नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया है।
अब हाई पावर कमेटी के गठन और तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकानों को हुए नुकसान के वास्तविक कारण क्या हैं और आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
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