स्थानीय लोगों ने निर्माण कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए, डीसी ने काम बंद करने के आदेश दिए; NHAI बोला- जरूरी इंजीनियरिंग उपाय किए गए
राजधानी शिमला के संजौली इलाके में नेशनल हाईवे की फोरलेनिंग के लिए चल रहे टनल निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टनलिंग के काम के चलते करीब 10 मकानों में दरारें आई हैं।
इससे वर्षों की मेहनत और जीवनभर की जमा पूंजी से बनाए गए घरों की सुरक्षा को लेकर लोग चिंतित हैं। मकानों में दरारें आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
स्थिति का जायजा लेने के लिए संबंधित कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे हैं। वहीं, डीसी शिमला ने काम बंद करने के आदेश जारी किए हैं। जिन घरों में दरारें आई हैं, वहां सुरक्षा दीवारें लगाने का काम भी किया जा रहा है।
हालांकि, स्थानीय निवासी अंशुल चौहान और रमेश चंद ठाकुर का कहना है कि किए जा रहे इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने और निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिमला में टनलिंग और फोरलेन निर्माण को लेकर इस तरह की चिंताएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले भट्टाकुफर और चलौंठी इलाके में भी ऐसी घटनाएं सामने आने की बात कही गई थी। अब संजौली में मकानों में आई दरारों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा और कमला नगर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने भी लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने निर्माण कंपनी से निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करने की अपील की है। साथ ही, जिन भवनों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें अधिग्रहित कर प्रभावित लोगों के नुकसान की भरपाई करने की मांग भी उठाई है।
NHAI ने दी सफाई
मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है। NHAI के अनुसार, दरारों को शिमला बाईपास प्रोजेक्ट के तहत चल रहे टनल निर्माण कार्य से जोड़कर रिपोर्ट किया जा रहा है।
प्राधिकरण ने कहा है कि प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान स्थापित इंजीनियरिंग मानकों के तहत जरूरी सावधानियां बरती गई हैं और संबंधित स्थानीय लोगों के साथ बातचीत भी की गई है।
NHAI ने बताया कि प्रभावित स्थानों पर जरूरी सुधार और मरम्मत के कार्य पहले ही किए जा चुके हैं। इनमें ग्राउटिंग, स्ट्रक्चरल रेट्रोफिटिंग, दरारों की सीलिंग एवं मरम्मत, ईंटों के काम को दोबारा ठीक करना तथा साइट की स्थिति और तकनीकी जरूरत के अनुसार अन्य इंजीनियरिंग उपाय शामिल हैं।
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि टनल निर्माण से जुड़ी ब्लास्टिंग गतिविधियां नवंबर 2025 में ही रोक दी गई थीं और इसके बाद कोई ब्लास्टिंग नहीं की गई है। NHAI ने कहा कि वह लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और प्रोजेक्ट क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत के अनुसार उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल संजौली के लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि उनके मकानों को और नुकसान न पहुंचे और वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया उनका आशियाना सुरक्षित रहे।
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