शिमला।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की अनदेखी जारी रही, तो इसका सीधा खामियाजा सरकार के कामकाज और आगामी चुनावों पर पड़ेगा।
हिमाचल कांग्रेस के दिग्गज नेता कौल सिंह ठाकुर ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है। कौल सिंह ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और तबादलों में हो रही कथित धांधली को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को घेरा है।
उनका कहना है कि मंत्रियों को स्वतंत्र जिम्मेदारी दी जानी चाहिए ताकि वे अपने विभागों को सुचारू रूप से चला सकें। आइए देखते हैं यह पूरी रिपोर्ट।
कौल सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के परिजनों को बिना किसी ठोस कारण के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने एक विशेष मामले का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर उन्होंने मंत्री से बात की थी। मंत्री ने आश्वासन भी दिया, लेकिन फाइल लंबे समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में लंबित रही।
ठाकुर ने आशंका जताई कि अधिकारियों के स्तर पर भी गड़बड़ियां हो सकती हैं, जिससे मूल सूची में बदलाव किया गया हो। उन्होंने कहा, कार्यकर्ता संगठन की रीढ़ होते हैं। अगर उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा, तो संगठन कमजोर होगा।
वरिष्ठ नेता ने आनंद शर्मा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी के संकेत मिल रहे हैं, जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। मंत्रियों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त सभी मंत्री अनुभवी और सक्षम हैं,
लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। विशेष रूप से शिक्षा विभाग का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री को व्यवस्था सुधारने की सलाह दी।
कौल सिंह ठाकुर ने संगठनात्मक नियुक्तियों में देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कई जिलों में अब तक जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के पद खाली हैं। आगामी पंचायत चुनाव कांग्रेस के लिए “सेमीफाइनल” की तरह हैं। उन्हें भरोसा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति और राजनीतिक समिति के गठन के बाद स्थिति सुधरेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू को मंत्रियों पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें पूरी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। फाइलें सीएमओ में अटकी रहने से विकास और प्रशासन पर बुरा असर पड़ता है। संगठन की नाराजगी पार्टी को महंगी पड़ सकती है।