छात्रों के कार्यक्रम में लगाए गए पोस्टर पर मचा हंगामा, निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने जातिगत भेदभाव वाले विचारों से संस्थान को किया अलग
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में वर्ण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए ‘शूद्रों का काम उच्च वर्गों की सेवा करना’ लिखा गया था।
पोस्टर सामने आने के बाद संस्थान में हंगामा मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए आईआईटी मंडी प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है।
जानकारी के अनुसार, आईआईटी मंडी के नॉर्थ कैंपस स्थित ऑडिटोरियम में छात्रों की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के लिए परिसर में कई पोस्टर लगाए गए थे। इनमें से एक पोस्टर ‘श्रीमद्भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ शीर्षक से था।
इस पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार श्रेणियों में बांटते हुए उनके कार्यों का उल्लेख किया गया था। पोस्टर के अनुसार ब्राह्मणों का कार्य भगवान के संदेश का प्रसार करना, क्षत्रियों का समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना, वैश्यों का अर्थव्यवस्था को चलाना और शूद्रों का कार्य उच्च वर्गों की सेवा करना बताया गया था।
पोस्टर में श्रीमद्भगवद्गीता का एक श्लोक भी उद्धृत किया गया था, जिसमें गुण और कर्म के आधार पर चार वर्णों के निर्माण की बात कही गई है। हालांकि, पोस्टर की भाषा और उसमें की गई व्याख्या को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
निदेशक ने ईमेल भेजकर जताई आपत्ति
विवाद सामने आने के बाद आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने संस्थान के संपूर्ण समुदाय को ईमेल भेजकर घटना की निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान जातिगत भेदभाव से जुड़े किसी भी विचार का समर्थन नहीं करता।
निदेशक ने कहा कि पोस्टर में गीता के संदेश की व्याख्या कुछ छात्रों की ओर से की गई थी और संस्थान स्वयं को इस व्याख्या से अलग करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जन्माष्टमी कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
प्रो. बेहरा लंबे समय से श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यापन से जुड़े रहे हैं और इस्कॉन से भी उनका जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि इस्कॉन जातिगत भेदभाव का सख्त विरोध करता है और वहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग पुजारी के रूप में सेवा करते हैं।
पोस्टर किसने बनाया, जांच में सामने आएगा
जांच समिति यह पता लगाएगी कि विवादित पोस्टर किसने तैयार किया था, उसे परिसर में प्रदर्शित करने की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत मिली और क्या इस मामले में संस्थान की ओर से किसी स्तर पर चूक हुई।
जांच के दौरान परिसर के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जाएंगे। समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मामला पुलिस को भी सौंपा जा सकता है।
आईआईटी मंडी में पहले भी विवादों में रहे हैं मामले
आईआईटी मंडी में इससे पहले भी कई घटनाओं को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2012 में फ्रेशर्स पार्टी के दौरान छात्रों ने महाभारत के ‘द्रौपदी चीरहरण’ प्रसंग पर आधारित एक लघु नाटक प्रस्तुत किया था, जिसे लेकर आपत्ति जताई गई थी। विरोध के बाद छात्रों को लिखित माफी मांगनी पड़ी थी।
वर्ष 2023 में निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा की ओर से छात्रों से मांसाहार न करने का संकल्प लेने की अपील भी चर्चा में रही थी। इसी दौरान उनके उस बयान को लेकर भी विवाद हुआ था, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं को पशुओं के प्रति क्रूरता से जोड़कर देखा था।
इसी वर्ष प्रो. बेहरा की नियुक्ति के कुछ समय बाद उनका एक पुराना वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने धार्मिक मंत्रों के जाप के जरिए परिवार को कथित तौर पर बुरी आत्माओं के प्रभाव से मुक्त कराने का दावा किया था।
वहीं, जून 2026 में आईआईटी मंडी के भारतीय ज्ञान प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र की ओर से एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें श्रीमद्भगवद्गीता, आयुर्वेद, पुनर्जन्म समेत विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए थे।
इस सम्मेलन को लेकर विज्ञानियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के एक समूह ने खुला पत्र जारी कर आईआईटी मंडी में ऐसे सम्मेलन की मेजबानी पर सवाल उठाए थे।
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