शिमला
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पंचायतीराज विभाग ने आरक्षण को लेकर नई अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें नियमों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर फंसा पेंच अब हाईकोर्ट के पाले में है, जिस पर बुधवार को फैसला आना तय है।
1. आरक्षण के नए दिशा-निर्देश
सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज (चुनाव) नियम, 2026 लागू करते हुए नियम 28, 87, 88 और 89 में बदलाव किए हैं:
आधार वर्ष: आरक्षण की गणना 2011 की जनगणना के आधार पर होगी। हालांकि, ओबीसी (OBC) वर्ग के लिए 1993-94 के सर्वेक्षण आंकड़े मान्य होंगे।
महिला आरक्षण: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के कुल पदों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
प्राथमिकता क्रम: रोस्टर में सबसे पहले अनुसूचित जाति (SC) और उसके बाद अनुसूचित जनजाति (ST) को प्राथमिकता मिलेगी।
5% का नियम: यदि किसी वार्ड या पंचायत में संबंधित वर्ग की आबादी 5% से कम है, तो वहां उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू नहीं होगा।
ओबीसी कोटा: पंचायत समिति और जिला परिषद में ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में अधिकतम 15% आरक्षण मिलेगा।
जनजातीय क्षेत्र: अनुसूचित क्षेत्रों में अध्यक्षों के सभी पद अनिवार्य रूप से ST वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगे।
राज्य सरकार ने अपना पिछला फैसला पलट दिया है। अब लगातार दो कार्यकाल से आरक्षित सीटों को 'ओपन' (अनारक्षित) करने का प्रावधान लागू नहीं होगा।
2. जिला उपायुक्तों (DC) को मिले विशेष अधिकार
रोस्टर प्रणाली को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने जिला उपायुक्तों को बड़ी शक्ति सौंपी है। अब डीसी भौगोलिक परिस्थितियों या विशेष अड़चनों को देखते हुए पंचायतों के रोस्टर में 5% तक बदलाव कर सकेंगे। यह निर्णय नियमों पर मिले सुझावों और आपत्तियों के बाद लिया गया है ताकि धरातल पर आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर किया जा सके।
3. हाईकोर्ट में कल का दिन अहम
पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन को लेकर दायर 15 याचिकाओं पर न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ बुधवार को अपना फैसला सुनाएगी।
चुनाव आयोग का पक्ष: आयोग ने स्पष्ट किया है कि 7 अप्रैल तक रोस्टर जारी करना अनिवार्य है ताकि 8 सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी की जा सके।
विवाद: याचिकाकर्ताओं ने 13 फरवरी 2026 के बाद नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है। कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि नई बनी पंचायतों का भविष्य क्या होगा।
4. नगर निगम (MC) अपडेट: सोलन, मंडी और पालमपुर में मेयर पद 'अनारक्षित'
तीन प्रमुख नगर निगमों—सोलन, मंडी और पालमपुर में मेयर और डिप्टी मेयर के पदों का आरक्षण भी 2011 की जनगणना के आधार पर तय हो गया है।
सरकार की इस नई अधिसूचना ने चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है, लेकिन सबकी निगाहें अब हाईकोर्ट के कल के फैसले पर टिकी हैं। यदि कोर्ट पुनर्गठन की अधिसूचनाओं पर कोई कड़ा रुख अपनाता है, तो चुनावी शेड्यूल में बदलाव की संभावना बन सकती है।