झंडूता।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने प्रदेश सरकार के 'आत्मनिर्भर हिमाचल' और 'व्यवस्था परिवर्तन' के दावों की धज्जियां उड़ाई हैं। कटवाल ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि धरातल पर विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और जनता केवल झूठी तसल्ली के भरोसे जी रही है।
जीतराम कटवाल ने सदन में चर्चा के दौरान कहा कि इस वर्ष का प्रदेश बजट पिछले साल की तुलना में 3586 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजट में इतनी भारी कटौती की गई है, तो आत्मनिर्भरता का सपना कैसे साकार होगा? विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखकर जनता को गुमराह कर रही है।
विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए भाजपा सरकार के समय झंडूता में 9 पुलों का निर्माण किया गया था। इनमें से 4 पुल आज भी केवल इसलिए जनता के काम नहीं आ रहे हैं, क्योंकि साढ़े तीन साल में सरकार उनके लिए 'अप्रोच रोड' तक नहीं बना पाई है।
नई डीपीआर (DPR) बनना तो दूर, पुरानी सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों को मीलों पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कटवाल ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी और टेंडरिंग में हो रही धांधली का खुलासा किया। लगभग ₹4 करोड़ की लागत से बनी 'टिहरी-पंजीण-रच्छेड़ा' सड़क की 3 साल में 3 बार रिपेयर हो चुकी है, फिर भी स्थिति खराब है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदार अनुमानित लागत से 10 से 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर भरते हैं। इससे अनुभवी ठेकेदार बाहर हो जाते हैं और घटिया काम करने वाले अपनी जेबें भर लेते हैं।
सरकार वित्तीय संकट के लिए अब आरडीजी (RDG) बंद होने का बहाना बना रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब आरडीजी मिल रही थी, तब साढ़े तीन साल में सरकार ने कौन सा बड़ा पहाड़ खोद दिया? — जीतराम कटवाल, विधायक, झंडूता