सोलन
हिमाचल प्रदेश की चर्चित निजी यूनिवर्सिटी, शूलिनी यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और उसके बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट ने न केवल यूनिवर्सिटी प्रशासन, बल्कि पूरे प्रदेश के निजी शिक्षा तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
छात्र की मौत के बाद कैंपस छावनी में तब्दील हो गया है। आक्रोशित छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और यूनिवर्सिटी के 'प्लेसमेंट मॉडल' को मौत का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
प्लेसमेंट का 'मायाजाल' या हकीकत?
यूनिवर्सिटी के दावों और धरातल की सच्चाई के बीच की खाई अब छात्रों के गुस्से के रूप में बाहर आ रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
पैकेज में धोखाधड़ी: छात्रों का आरोप है कि प्लेसमेंट के समय जो वेतन (Salary Package) बताया जाता है, असलियत में वह बहुत कम मिलता है।
शर्तों का उल्लंघन: ऑफर लेटर में लिखी शर्तें जॉइनिंग के बाद बदल दी जाती हैं।
मानसिक प्रताड़ना: छात्रों को "किसी भी हाल में नौकरी न छोड़ने" के लिए मजबूर किया जाता है। आरोप है कि यदि कोई छात्र नौकरी छोड़ना चाहता है, तो उसे भविष्य खराब करने की धमकी दी जाती है।
यूनिवर्सिटी का एक छात्र कहा हमसे कहा जाता है कि किसी भी कीमत पर जॉब मत छोड़ो, वरना करियर बर्बाद कर देंगे। क्या हम यहाँ पढ़ने आए हैं या बंधुआ मजदूरी करने?
अवनी खोसला पर गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में अवनी खोसला का नाम भी चर्चा में है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा है कि छात्रों पर दबाव बनाने और सिस्टम को मनमाने ढंग से चलाने में उनकी भूमिका संदिग्ध है। हालांकि, प्रशासन या पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कैंपस की दीवारों पर उनके खिलाफ नारेबाजी स्पष्ट सुनी जा सकती है।
मृतक छात्र के साथियों का कहना है कि वह लंबे समय से प्लेसमेंट और करियर को लेकर मानसिक तनाव में था। सुसाइड नोट में कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के सिस्टम को अपनी मौत का कारण बताया गया है, जिसने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
विवादों का पुराना नाता: क्या 'सेफ' है कैंपस?
शूलिनी यूनिवर्सिटी के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय में यहाँ कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है:
घटनाविवरणनशा (चिट्ठा) कांड कैंपस के भीतर और बाहर ड्रग्स की सप्लाई के गंभीर आरोप। गोलीकांड यूनिवर्सिटी परिसर में फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली। हिंसक झड़पें छात्राओं और छात्रों के बीच आए दिन होने वाली मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
कैंपस में 'जस्टिस' की मांग
यूनिवर्सिटी परिसर "वी वांट जस्टिस" और "प्लेसमेंट का सच बताओ" जैसे नारों से गूंज रहा है। छात्रों का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और प्लेसमेंट सिस्टम की निष्पक्ष जांच नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।
अभिभावकों का डर
इस घटना के बाद प्रदेश भर के अभिभावकों में डर का माहौल है। लाखों रुपये की फीस भरने के बाद भी अगर बच्चे सुरक्षित नहीं हैं और मानसिक दबाव में खुदकुशी जैसा कदम उठा रहे हैं, तो यह निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या प्रशासन इस बार निष्पक्ष जांच करेगा, या फिर पिछले मामलों की तरह इसे भी रफा-दफा कर दिया जाएगा? क्या शिक्षा के नाम पर चल रहे इस 'धंधे' पर लगाम लगेगी? फिलहाल, सबकी नजरें पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।