शिमला।
हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज विधानसभा में एक बड़ी घोषणा की है। प्रदेश सरकार जल्द ही असिस्टेंट प्रोफेसर के 100 पदों को भरने जा रही है। खास बात यह है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए 'वॉक-इन-इंटरव्यू' की परंपरा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि असिस्टेंट प्रोफेसर के इन 100 पदों को हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (HPSRA) के माध्यम से भरा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वॉक-इन-इंटरव्यू की जगह लिखित परीक्षा के आधार पर ही नियुक्तियां होंगी।
भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के पीछे का कारण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा हमने सिफारिश की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू बंद करने का निर्णय लिया है। अक्सर इंटरव्यू के नाम पर भाई-भतीजावाद और सिफारिशों के आरोप लगते थे। अब केवल मेधावी और योग्य डॉक्टर ही लिखित परीक्षा पास कर असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शिमला के IGMC और कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज तक सीमित रहना नहीं है। सरकार प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों (जैसे नाहन, चंबा, हमीरपुर और मंडी) को भी सभी अत्याधुनिक सुविधाओं और पर्याप्त स्टाफ के साथ सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।