शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों कमर्शियल एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों का भारी संकट गहरा गया है। इस किल्लत का असर अब सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा की व्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल रहा है।
आलम यह है कि बजट सत्र के दौरान सैकड़ों लोगों के लिए तैयार होने वाला भोजन अब आधुनिक गैस चूल्हों के बजाय पारंपरिक तरीके से लकड़ी के चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है।
विधानसभा सत्र के लिए भोजन की आपूर्ति मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के होटलों, विशेष रूप से होटल हॉलिडे होम और पीटरहॉफ़ से की जाती है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण इन होटलों की रसोई में अब लकड़ियों के बड़े-बड़े ढेरों का इस्तेमाल हो रहा है। रसोइयों को भारी मशक्कत के बाद समय पर खाना तैयार करना पड़ रहा है।
गैस न मिलने के कारण अब बाजार से लकड़ियां खरीदी जा रही हैं। इससे न केवल भोजन तैयार करने की लागत बढ़ गई है, बल्कि रसोइयों और सहायकों का श्रम भी दोगुना हो गया है। बड़े बर्तनों में भारी मात्रा में खाना लकड़ी की आंच पर पकाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश पर्यटन निगम के कुक धनी राम ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा।गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत चल रही है। हमें रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए भोजन तैयार करना होता है।
चूंकि सत्र चल रहा है, इसलिए हम देरी नहीं कर सकते। मजबूरन हमें पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। लकड़ी पर बड़े पैमाने पर खाना बनाना काफी मुश्किल भरा काम है, लेकिन मेहमानों को समय पर खाना खिलाना हमारी प्राथमिकता है।