शिमला।
हिमाचल प्रदेश में कुदरत का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। प्रदेश की ऊंची चोटियों—रोहतांग, कुंजुम और बारालाचा—में ताजा हिमपात हुआ है, जिससे पूरी घाटी शीतलहर की चपेट में आ गई है।
वहीं, राजधानी शिमला और इसके ऊपरी क्षेत्रों जैसे ठियोग, रोहड़ू और चौपाल में तेज आंधी के साथ भारी ओलावृष्टि दर्ज की गई है। नेरवा में आंधी का वेग इतना अधिक था कि एक घर की छत तक उड़ गई, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
बेमौसम की इस मार ने प्रदेश के किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। मई के महीने में हुई इस ओलावृष्टि और आंधी के कारण सेब के बगीचों सहित अन्य गुठलीदार फलों को व्यापक नुकसान पहुँचा है।
मैदानी इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। मौसम के इस मिजाज ने साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है, जिससे किसान अब सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
तापमान में भारी गिरावट और रिकॉर्ड बारिश
मई की चिलचिलाती धूप के बजाय प्रदेश में कड़ाके की ठंड लौट आई है। सोमवार को दिन का तापमान सामान्य से 3°C से 9°C तक कम दर्ज किया गया। वर्षा के आंकड़ों ने भी सबको चौंका दिया है; एक ही दिन में सामान्य से 50% से 493% अधिक बारिश हुई।
सराहन में सर्वाधिक 35 मिमी, मंडी में 28 मिमी और सोलन में 20 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिसने गर्मी के मौसम में दिसंबर जैसा अहसास करा दिया है।
आगामी दिनों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। मंगलवार तक प्रदेश के कई हिस्सों में ओलावृष्टि का 'ऑरेंज अलर्ट' बरकरार है। इसके अलावा, अगले तीन दिनों तक 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का 'यलो अलर्ट' भी जारी किया गया है।
प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और ऊंचे क्षेत्रों की ओर न जाने की सलाह दी है।