शिमला।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मंगलवार को प्रदेश के चार बड़े नगर निगमों—सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर—सहित 47 नगर पंचायतों और नगर परिषदों के लिए चुनाव तिथियों की घोषणा कर दी गई है। राजनीतिक गलियारों में इन चुनावों को 'मिशन-2027' से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है, जो राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार और संगठन, दोनों के लिए साख की लड़ाई बन गया है।
यह चुनाव केवल स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड भी तय करेंगे। विशेष रूप से विनय कुमार के प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान है।
बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों के लिए भी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और शक्ति प्रदर्शन करने का यह अंतिम अवसर होगा।
जहाँ एक ओर नगर निगमों के चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर लड़े जाएंगे, वहीं पंचायत, जिला परिषद और ब्लॉक समिति के चुनावों में राजनीतिक दल सीधे तौर पर सिंबल का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके बावजूद, कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पर्दे के पीछे से पूरी ताकत झोंक रही हैं ताकि जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर उनकी विचारधारा के सदस्य ही काबिज हों।
इस चुनावी महासमर में सबसे अधिक नजर शिमला संसदीय क्षेत्र पर टिकी है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण राजनीतिक समीकरण हैं वर्तमान में कांग्रेस के 40 विधायकों में से एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से है।
प्रदेश सरकार के पांच मंत्री और खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इसी संसदीय क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। शिमला जिला परिषद के नतीजे सीधे तौर पर संगठनात्मक मजबूती का पैमाना बनेंगे। यहाँ किसी भी तरह की कमजोरी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र हमीरपुर संसदीय क्षेत्र और राज्यसभा सदस्य व प्रभावशाली मंत्रियों वाले कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भी चुनावी तपिश महसूस की जा रही है।राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की घोषणा अगले सप्ताह होने की संभावना है।
फिलहाल, शहरी निकाय चुनावों के साथ ही हिमाचल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक घेराबंदी का दौर शुरू हो गया है।