शिमला I
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। राज्य सरकार ने राजीव गांधी वन संवर्धन योजना (RGVSY) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 4,000 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें 15,000 महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिलने की संभावना है।
सरकार ने इस अभियान को पूरी तरह से सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित किया है। योजना के तहत 1,100 सामुदायिक समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कुल समूहों में से 60 प्रतिशत महिला समूह, 20 प्रतिशत युवा समूह और 20 प्रतिशत अन्य स्वयं सहायता समूह (SHGs) शामिल होंगे।
पिछले वर्ष 300 महिला समूहों और 145 अन्य समूहों ने 1,100 हेक्टेयर भूमि पर सफलतापूर्वक पौधरोपण किया था।
सरकार ने ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है इस योजना के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। प्रत्येक समूह को प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये प्रदान किए जा रहे हैं।
एक समूह 2 से 5 हेक्टेयर तक भूमि पर कार्य कर सकता है। पौधों को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी समूहों की होगी। यदि एक वर्ष बाद पौधों के जीवित रहने की दर 50 प्रतिशत से अधिक रहती है, तो समूह को प्रति 2 हेक्टेयर पर 1 लाख रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में प्रदेश में हरे पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
युवक और महिला मंडलों को बंजर भूमि पर फलदार और अन्य उपयोगी पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। समूहों को न केवल पेड़ लगाने बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी जवाबदेह बनाया गया है।
राज्य सरकार के इन प्रयासों से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है, बल्कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का भी निरंतर विस्तार हो रहा है। यह योजना भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्थायी हरित संपदा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।