हिमाचल में कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी में बड़ा बदलाव, कठिन क्षेत्रों में 5 पसंदीदा स्टेशन का विकल्प खत्म

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हिमाचल में कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी में बड़ा बदलाव, कठिन क्षेत्रों में 5 पसंदीदा स्टेशन का विकल्प खत्म

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कार्मिक विभाग ने CGP-2013 के पैरा 16.1 में किया संशोधन, अब तबादले प्रशासनिक जरूरत और जनहित के आधार पर होंगे

हिमाचल प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग ने राज्य कर्मचारियों के लिए लागू ट्रांसफर पॉलिसी (CGP-2013) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। विभाग ने पॉलिसी के पैरा 16.1 में बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इसके तहत कठिन, हार्ड और जनजातीय क्षेत्रों में सेवा पूरी करने के बाद कर्मचारियों को मिलने वाला 5 पसंदीदा स्टेशनों का विकल्प अब समाप्त कर दिया गया है।

सरकार ने यह फैसला तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया है। अब कर्मचारियों के स्थानांतरण व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं, बल्कि विभागीय जरूरत और जनहित को ध्यान में रखकर किए जाएंगे।

कठिन और जनजातीय क्षेत्रों में 3 साल का कार्यकाल तय

नई व्यवस्था के अनुसार कठिन, हार्ड और जनजातीय क्षेत्रों में कर्मचारियों का सामान्य कार्यकाल 3 साल निर्धारित किया गया है। इसमें 2 सर्दियां और 3 गर्मियां शामिल होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी इस अवधि के दौरान लंबी छुट्टी पर रहता है तो उसकी छुट्टी की अवधि कार्यकाल में शामिल नहीं की जाएगी।

ऐसे कर्मचारियों को छुट्टी की अवधि पूरी होने के बाद उतने ही अतिरिक्त दिनों तक संबंधित क्षेत्र में सेवा देनी होगी।

अतिरिक्त प्रभार की सेवा कार्यकाल में नहीं होगी शामिल

सरकार ने अधिसूचना में यह भी साफ किया है कि केवल अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) के रूप में दी गई जिम्मेदारी को कठिन क्षेत्र के 3 साल के कार्यकाल में नहीं गिना जाएगा।

यानी किसी कर्मचारी ने किसी पद पर नियमित तैनाती के बिना अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाई है तो उसे इस अवधि का लाभ नहीं मिलेगा।

55 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों को राहत

नई ट्रांसफर नीति में 55 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। ऐसे कर्मचारियों को पदोन्नति के मामलों को छोड़कर सामान्य परिस्थितियों में कठिन क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास

प्रदेश सरकार का कहना है कि ट्रांसफर पॉलिसी में किए गए ये बदलाव कठिन क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए गए हैं। नई व्यवस्था से तबादलों में पारदर्शिता आएगी और विभागों को आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों की नियुक्ति करने में सुविधा मिलेगी।
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