'आपदा रक्षक' ऐप से मिलेगा रीयल-टाइम अलर्ट, AI और सैटेलाइट तकनीक से जंगलों की निगरानी; मानसून में अब तक ₹1,000 करोड़ का नुकसान।
हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और वन संसाधनों के बेहतर संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट मैपिंग के माध्यम से जंगलों की रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी, जिससे जंगल की आग जैसी पारिस्थितिक आपदाओं की रोकथाम और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में मदद मिलेगी।
कम बारिश के बावजूद ₹1,000 करोड़ का नुकसान
पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव (आपदा प्रबंधन) डॉ. पुष्पेंद्र राणा के अनुसार, इस बार मानसून के दौरान अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश को अब तक करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में कांगड़ा, लाहौल और पांगी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 130 सड़कें अभी भी बंद हैं और उन्हें जल्द से जल्द बहाल करने का कार्य लगातार जारी है।
'आपदा रक्षक' ऐप देगा रीयल-टाइम अलर्ट
राज्य सरकार ने लोगों तक समय पर मौसम और आपदा संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए 'आपदा रक्षक' मोबाइल ऐप शुरू किया है। इस ऐप के जरिए मौसम का पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी, आपदा अलर्ट और सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी रीयल-टाइम में उपलब्ध कराई जाती है।
डॉ. राणा ने बताया कि शिमला स्थित कंट्रोल सेंटर से इस ऐप की निगरानी की जा रही है। कोई भी नागरिक अपने आसपास होने वाली आपदा की सूचना ऐप के माध्यम से साझा कर सकता है। राज्य का कोई भी व्यक्ति इसे डाउनलोड कर समय रहते आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकता है।
AI और सैटेलाइट तकनीक से होगी जंगलों की निगरानी
सरकार का मानना है कि AI आधारित विश्लेषण और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए वन क्षेत्रों की लगातार निगरानी संभव होगी। इससे जंगल की आग जैसी घटनाओं की समय रहते पहचान, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक जलवायु वित्त तक पहुंच आसान होगी। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा सकेगा।
चीड़ की सूखी सुइयों से बनेगा आर्थिक संसाधन
सरकार के अनुसार, चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली सूखी सुइयों, जो अक्सर जंगल की आग का बड़ा कारण बनती हैं, उन्हें औद्योगिक उपयोग के संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
इससे एक ओर आग के खतरे को कम किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के साथ नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।
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