23 वर्षों से पक्षी संरक्षण में जुटे चिकित्सक, 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित; दुर्लभ पक्षियों की खोज में दिया अहम योगदान
पेशे से चिकित्सक और जुनून से पक्षी प्रेमी एवं बर्ड फोटोग्राफर डॉ. अभिनव चौधरी ने हिमाचल प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में वर्षों की मेहनत से पक्षियों की दुनिया को कैमरे में कैद किया है। प्रकृति और पक्षियों के प्रति उनके लगाव ने उन्हें दो दशक से अधिक समय तक हिमाचल के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया।
इस दौरान उन्होंने 600 से अधिक पक्षी प्रजातियों का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया, कई दुर्लभ पक्षियों का दस्तावेजीकरण किया और वैज्ञानिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं।
बचपन के शौक ने बदला जीवन का उद्देश्य
डॉ. चौधरी ने बताया कि पक्षियों को देखने का शौक उन्हें बचपन से था। शुरुआत दूरबीन के माध्यम से हुई, लेकिन समय के साथ पुस्तकों, कैमरे और आधुनिक तकनीक ने उनके अनुभव को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि कैमरे की मदद से न केवल पक्षियों की पहचान आसान हुई, बल्कि उनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने में भी सहायता मिली।
डॉक्टर की जिम्मेदारी के साथ निभाया बर्डिंग का जुनून
चिकित्सा पेशे में होने के बावजूद डॉ. अभिनव चौधरी ने अपने शौक और जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखा। वे छुट्टियों और उपलब्ध समय में ही बर्डिंग करते हैं और अपने पेशे को कभी प्रभावित नहीं होने दिया।
उन्होंने बताया कि लाहौल-स्पीति, पांगी और हिमाचल के अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पक्षियों की फोटोग्राफी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। कई बार दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए लंबी ट्रैकिंग करनी पड़ती है और कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
दुर्लभ पक्षियों को कैमरे में किया कैद
डॉ. चौधरी ने येलो-ब्रेस्टेड बंटिंग, पर्पल बैक स्टारलिंग, लिटिल क्रेक सहित कई दुर्लभ पक्षियों की तस्वीरें खींची हैं। उन्होंने बताया कि कई बार सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा के बाद भी पक्षी दिखाई नहीं देते, लेकिन जब कोई दुर्लभ प्रजाति कैमरे में कैद हो जाती है तो सारी मेहनत सफल महसूस होती है।
हिमाचल के राज्य पक्षी वेस्टर्न ट्रेगोपैन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिकार और बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण यह पक्षी बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच चुका है। इसकी तस्वीर लेने के लिए कई दिनों तक जंगलों में धैर्य के साथ इंतजार करना पड़ता है।
600 प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों का रिकॉर्ड
डॉ. अभिनव चौधरी ने अब तक करीब 600 पक्षी प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया है। हिमाचल में पहली बार दर्ज हुई लगभग 30 पक्षी प्रजातियों की खोज में भी उनका योगदान रहा है।
उनके 60 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके शोध कार्यों के आधार पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच "बर्ड्स ऑफ द वर्ल्ड" में लेखन का अवसर भी मिला है। इसके अलावा वे प्रतिष्ठित पत्रिका "इंडियन बर्ड्स" के संपादकीय बोर्ड से भी जुड़े हैं।
वन्यजीव संरक्षण में विभाग के साथ सहयोग
डॉ. चौधरी वन्यजीव विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाए रखते हैं। वे पक्षी गणना अभियानों, सर्वेक्षणों और संरक्षण गतिविधियों में भाग लेते हैं तथा वैज्ञानिक जानकारी और फोटोग्राफ उपलब्ध करवाते हैं।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर जताई चिंता
डॉ. चौधरी ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास होना चाहिए जिससे प्रकृति और वन्यजीवों को कम से कम नुकसान पहुंचे। उन्होंने अनियंत्रित कटान, आर्द्रभूमियों के खत्म होने, अवैध गतिविधियों और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप को पक्षियों के लिए बड़ी चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि कई ऐसी पक्षी प्रजातियां हैं जो पहले हिमाचल में आसानी से दिखाई देती थीं, लेकिन अब उनकी संख्या लगातार कम हो रही है।
युवाओं से प्रकृति से जुड़ने की अपील
डॉ. अभिनव चौधरी के अनुसार पक्षी फोटोग्राफी उनके लिए कमाई का माध्यम नहीं बल्कि प्रकृति को समझने, वैज्ञानिक जानकारी जुटाने और समाज को जागरूक करने का जरिया है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताने के बजाय प्रकृति से जुड़ें। उन्होंने कहा कि सकारात्मक हॉबी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। साथ ही उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने लक्ष्य और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।
अपने 23 वर्षों के सफर का श्रेय उन्होंने परिवार और बर्डिंग से जुड़े मित्रों को दिया, जिनके सहयोग से उनका यह अभियान लगातार आगे बढ़ता रहा।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube