शिमला/कुल्लू:
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कुल्लू जिला के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल में कथित तौर पर आयोजित होने वाली "रेव पार्टियों" (Rave Parties) पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कुल्लू के जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से मौके का निरीक्षण करने और 10 दिनों के
भीतर अपनी सीलबंद रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को भी निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने निजी हलफनामे (Personal Affidavits) दाखिल करें और मीडिया में छपी खबरों पर अपना स्पष्टीकरण दें। इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को तय की गई है।
7 से 11 जून तक आयोजन: सोशल मीडिया पर भारी प्रचार
हाई कोर्ट के ध्यान में लाए गए मामले के अनुसार, कसोल (जिसे मिनी इजरायल भी कहा जाता है) में एक बड़ा घटनाक्रम चल रहा है कसोल में 7 जून से 11 जून 2026 तक चार दिनों के एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
दावों के मुताबिक, इस आयोजन के लिए लगभग 10,000 लोगों ने पहले ही बुकिंग करा ली है और इसके मुख्य आयोजक इजरायली मूल के नागरिक हैं। ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने और पैसे कमाने के लिए तेज आवाज वाले डीजे संगीत के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किए जा रहे हैं।
10 से 16 हजार रुपये तक की एंट्री टिकट
इस कथित रेव पार्टी के व्यावसायिक तौर-तरीकों को लेकर भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
महंगी टिकटें: प्रति व्यक्ति एंट्री टिकट की कीमत 10,000 रुपये से लेकर 16,000 रुपये के बीच रखी गई है।
देश-विदेश से पहुंच रहे लोग: इस आयोजन में शामिल होने के लिए चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, गोवा सहित इजरायल जैसे विदेशी स्थानों से भी लोग भारी संख्या में कुल्लू पहुंच रहे हैं।
पिछले साल भी कोर्ट पहुंचा था मामला, सरकार को नोटिस
कुल्लू और मनाली घाटी में पर्यटन के नाम पर होने वाले इस तरह के आयोजनों का विवाद नया नहीं है:
सोसाइटी ने उठाई थी आवाज: पिछले साल 'हिमालयन एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन सोसाइटी, कुल्लू' ने हाई कोर्ट को बताया था कि कसोल, जिभी, मनाली और कुल्लू के अन्य हिस्सों में धड़ल्ले से "रेव पार्टियां" आयोजित की जा रही हैं।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप: कोर्ट के समक्ष यह बात भी सामने आई थी कि बड़े रसूखदारों और राजनीतिक संरक्षण के बिना ऐसी हाई-प्रोफाइल पार्टियां मुमकिन नहीं हैं, क्योंकि कुछ वीआईपी एंट्री टिकटों की कीमत ₹5,000 से लेकर ₹7,00,000 तक पहुंच जाती है।
हाई कोर्ट ने इस पूरे नेटवर्क और अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।